उत्तराखंड के खिलाड़ियों को आखिर 14 साल बाद खेल नीति का तोहफा मिल गया है। रविवार को मंत्रिमंडल ने कुछ सुझावों के साथ खेल नीति को लागू करने की मंजूरी दे दी। बताया जा रहा है कि नए साल में खेल नीति लागू करने की तैयारी है।
हरीश रावत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अधिकारियों को खेल नीति बनाने के निर्देश दिए थे। 2015 और 2016 तक प्रदेश में खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विशेष जोर दिया। नौ नवंबर को निशानेबाज जसपाल राणा की अध्यक्षता में बनी समिति ने खेल नीति का फाइनल ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपा था। रविवार को हुई मंत्रिमंडल (कैबिनेट) बैठक में कुछ सुझावों के साथ खेल नीति को स्वीकृति दे दी गई।
सूत्रों की मानें तो जनवरी 2015 में खेल नीति लागू हो जाएगी। इसके साथ ही खेल सुविधाओं के विकास और खिलाड़ियों को तैयार करने की नई योजनाएं भी लागू होंगी। कैबिनेट ने खेल नीति लागू होने के पांच साल के भीतर प्रदेश में खेल अवस्थापना सुविधाओं को विकसित कर राज्य में 38वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन को तवज्जो दी है। साथ ही खिलाड़ियों को प्रदर्शन के अनुरूप पुरस्कार सम्मान और कोचों को तैयार करने का खेल विभाग का प्रस्ताव भी पास हो गया।
यह होगा लाभ
-खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और निर्णायकों को प्रदर्शन का मिलेगा पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आधार पर पुरस्कार तय
-भूतपूर्ण खिलाड़ियों की पेंशन का रास्ता हुआ साफ, हर महीने बिना नौकरी वाले पूर्व खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ
-राज्य और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मिलेगा आर्थिक प्रोत्साहन
-राज्य खेल पुरस्कार योजना होगी शुरू, राज्य के 15 खिलाड़ियों को हर साल मिलेगा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर पुरस्कार
-राज्य के लिए एनआईएस कोच तैयार कराएगा खेल विभाग, एनआईएस कोचिंग का देगी खर्च
-विभिन्न खेलों के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होंगे। एक्सीलेंस में पूर्ण कालिक मान्यता प्राप्त प्रशिक्षकों की होगी तैनाती
-राज्य में स्पोर्ट्स लैब बनेगा, जहां खेलों में तकनीकि, बायोमैकेनिक और सिमुलेशन के आधार पर खिलाड़ियों को उनसे संबंधित खेलों में उच्च स्तरीय प्रदर्शन के लिए दिशा मिलेगी
-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नौकरी दी जाएगी
खेल नीति के लक्ष्य
-विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने के लिए 5 और 10 साल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है
-राजीव गांधी खेल अभियान योजना के अंतर्गत 5 साल में ब्लॉक स्तर पर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स
-ग्रामीण क्षेत्र में युवक मंगल दल, महिला मंगल दल और खेल क्लबों को खेल सामग्री दी जाएगी
-खेल विभाग के स्थापित आवासीय क्रीड़ा छात्रावासों का उच्चीकरण कर आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा दी जाएगी
-राज्य के हर जिले में स्पोर्ट्स हॉस्टल और स्पोर्ट्स स्कूल खोले जाएंगे
-जिला व राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को नगद पुरस्कार दिया जाएगा
-राज्य खेल पुरस्कार शुरू होंगे, उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा
-रेफरी और निर्णायकों के लिए भी पुरस्कार शुरू होंगे
-पदक विजेताओं को नगद पुरस्कार दिए जाने की वर्तमान में स्वीकृत 7 श्रेणियों को बढ़ाकर 22 श्रेणी में किया गया, पुरस्कार राशि को भी बढ़ाया
-प्रदेश में खेल एकेडमी की स्थापना के लिए प्रोत्साहन मिलेगा
-खेल विभाग का संगठनात्मक ढांचा होगा मजबूत
-विभाग में पीपीपी मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा और निजी संस्थाओं, व्यक्तियों को वित्त विभाग की सहमति से प्रोत्साहन स्वरूप सेवा कर, स्टांप ड्यूटी में छूट मिलेगी
-राज्य के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय चुनिंदा लोकप्रिय खेलों की स्पोर्ट्स पॉकेट बनाए जाएंगे
-खेल विभाग 41 खेलों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्रोत्साहित करेगा
-पुलिस, शैक्षिक संस्थान, स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय में उपलब्ध खेल अवस्थापनाओं को उच्चीकृत कर उनका उपयोग होगा, साथ ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जाएगा