महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में जब टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड की धरती पर कदम रखे थे तो उस समय वह वनडे रैंकिंग में नंबर वन थी। लेकिन पांच मैचों की वनडे सीरीज के शुरुआती दो मैच हारकर धोनी की टीम नंबर वन के सिंहासन से उतर चुकी है। और अब उस पर सीरीज में बने रहने के दबाव है।
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यह वही टीम इंडिया है जिसने पिछले साल लगातार छह वनडे सीरीज जीतने का कारनामा किया था लेकिन इस साल उसे हार से शुरुआत करनी पड़ी है। यह हार इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि जो टीम भारत को धूल चटा रही है वह रैंकिंग मामले में भारतीय टीम से कोसों दूर है।
न्यूजीलैंड के शानदार प्रदर्शन का फायदा ऑस्ट्रेलिया को हुआ और वह बैठे-बैठे नंबर वन गया। नंबर वन बनते ही वहां की मीडिया वर्ल्ड चैंपियन टीम की खूब खिल्ली भी उड़ा रहे हैं।
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बाएं हाथ के इस धाकड़ बल्लेबाज का 'फ्लॉप शो'
वीरेंद्र सहवाग के बाद शिखर धवन टीम इंडिया के एक ऐसे बल्लेबाज हैं जो धमाकेदार और सधी शुरुआत देकर भारत की जीत की राह तय कर देते हैं।
पिछले साल भारत की जीत में बाएं हाथ के इस बल्लेबाज की शानदार पारी का अहम योगदान रहा था। पिछला साल धवन के लिए बेहद यादगार साबित ह़ुआ। उन्होंने वनडे क्रिकेट में पांच शतक लगाए थे जो उस साल सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज रहे।
लेकिन इस साल शिखर धवन का बल्ला कुछ नहीं कर पा रहा है और वह अब तक 'फ्लॉप शो' साबित हो रहे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों में वह क्रमशः 32 और 12 रन ही बना पाए हैं। तेज पिचों पर शॉर्ट बॉल खेलने में उनकी कमजोरी साबित भी हो रही है।
जारी है रोहित शर्मा की असफलता
किसी भी टीम की जीत के लिए अच्छी शुरुआत की जरूरत होती है। लेकिन भारत को इस सीरीज में ठोस शुरुआत नहीं मिल पा रही है।
शिखर धवन तो फ्लॉप हो ही रहे हैं साथ ही उनके सलामी जोड़ीदार रोहित शर्मा भी जल्द आउट हो जा रहे हैं। यहां यह बात दीगर है कि दोनों टीम को सधी शुरुआत तो दिलाने में कामयाब रहते हैं लेकिन आगे नहीं खींच पा रहे हैं। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों में 3 और 20 रन बनाए हैं।
पिछले साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक हजार से ज्यादा रन बनाने वाले दाएं हाथ के बल्लेबाज रोहित भी नाकाम रहे हैं। वह दक्षिण अफ्रीका में भी रन नहीं बना सके थे। ऐसे में अब कहा जा रहा है कि जब रन नहीं बना रहे हैं तो टीम में उनके लिए जगह भी नहीं होनी चाहिए।
रवींद्र जडेजा की आलराउंड नाकामी
पिछले साल वनडे रैंकिंग में नंबर वन की कुर्सी पर काबिज होने वाले आलराउंडर रवींद्र जडेजा का भी आउट ऑफ फॉर्म होना टीम इंडिया के लिए चिंता का सबब है।
वह न सिर्फ बल्ले से नाकाम रहे हैं बल्कि गेंदबाजी में कुछ खास नहीं कर पा रहे है। सीरीज शुरू होने से पहले आठवें पायदान पर रहने वाली कीवी टीम के बल्लेबाजों पर भी जडेजा लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। दो मैचों में 17 ओवर में 107 रन देकर दो विकेट झटके। जबकि बल्लेबाजी में वह 0 और 12 रन ही बना पाए।
पिछले साल भारत के शानदार खेल में जडेजा का आलराउंड खेल का भी अहम योगदान था। लेकिन नए साल में जडेजा भी अब तक कमाल नहीं दिखा पाए हैं।
बेअसर साबित हो रहे सुरेश रैना
कभी टीम इंडिया के खेवनहार कहे जाने वाले सुरेश रैना लंबे समय से मैच जीताऊ पारी नहीं खेल पा रहे हैं। वह लंबे शॉट के लिए जाने जाते हैं पर अब वह उनके बल्ले में वो जोश नहीं दिखता।
रैना अब जिस अंदाज में खेलते हैं उससे नहीं लगता कि वह टीम को कभी जीत दिला पाएंगे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सुरेश रैना की लगातार असफलता ने भी उनका आत्मविश्वास डगमगा दिया है।
कारण जो भी रैना फिलहाल वर्ल्ड चैंपियन जैसी टीम के एकादश में जगह पाने की योग्यता नहीं रखते हैं और उनकी टीम में रहने से एक बल्लेबाज की जगह मारी जा रही है। पिछले दो मैचों में उन्होंने 18 और 35 रन बनाए।
गेंदबाजी में इंशात शर्मा का खर्चीला होना
यह टीम इंडिया की बदकिस्मत ही है जब उनका एक तेज गेंदबाज चलता है दूसरा फ्लॉप हो जाता है। अभी मोहम्मद शमी जबर्दस्त फॉर्म में हैं और विपक्षी बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए संघर्ष कराते हैं तो दूसरी ओर टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज इशांत शर्मा बेअसर साबित हो रहे हैं।
इशांत शर्मा रन रोकने में कामयाब नहीं हो रहे हैं। वह लगातार रन लुटा रहे हैं। विकेट लेने को कौन कहे वह बल्लेबाजों पर भी कोई प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं।
अनुभवहीन कीवी बल्लेबाज सौ से ज्यादा वनडे विकेट ले चुके इशांत की गेंद पर आराम से रन बनाते हैं। ऐसे में अब वक्त आ गया है कि इशांत की जगह वरुण एरोन या ईश्वर पांडे को मौका दिया जाए।
टीम में अब अश्विन का क्या काम!
महेंद्र सिंह धोनी को सबसे सफल भारतीय कप्तान बनने के लिए तीन मैच और जीतने हैं लेकिन पांच मैचों की सीरीज में वह पहले के दो मैच हार चुके हैं। हार में गेंदबाजी का लचर प्रदर्शन भी मुख्य कारण है।
धोनी की हार में उनके प्रिय गेंदबाज आर अश्विन का पूरी तरह से असफल होना भी है। वह लंबे समय से टीम में हैं लेकिन गेंदबाजी में कमाल नहीं दिखा सके हैं। खासकर विदेशी धरती पर वह बुरी तरह से असफल रहे हैं।
दोनों मैचों में मिलाकर उन्होंने कुल 18 ओवर फेंके हैं और 102 रन लुटाए, लेकिन एक भी सफलता नहीं मिली।
न्यूजीलैंड में टीम इंडिया की दुर्गति के लिए खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी कम दोषी नहीं हैं। उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि गेंदबाजी की तुलना में बल्लेबाजी उनका मजबूत स्तंभ है।
लेकिन धोनी हैं कि मानते नहीं। इस सीरीज में उन्होंने दोनों ही बार टॉस जीता लेकिन बल्लेबाजी के बजाए पहले गेंदबाजी चुना।
गेंदबाजी में मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार को छोड़कर कोई भी विपक्षी बल्लेबाजों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा फिर भी वह पहले गेंदबाजी पर भरोसा जताते हैं। रन लुटाने के बाद बड़े लक्ष्य का पीछा करने में भारतीय बल्लेबाजी बिखर जाती है और टीम को हार मिलती है। कप्तान धोनी ने दक्षिण अफ्रीका में कमोबेश यही किया और हार का सामना किया।