फुटबाल के मैदान में पुरुषों का वर्चस्व तोड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का मान बढ़ाने के बावजूद अनीता रावत को अपने प्रदेश में सिवाय उपेक्षा के कुछ नहीं मिला।
नतीजा खेल फलक पर उभरते इस सितारे ने चमक बरकरार रखने के लिए ‘घर’ छोड़ दिया।
अब दिल्ली में प्रोफेशनल क्लब से जुड़कर लीग मैचों में जलवा बिखेर रही अनीता खेल के मौकों के साथ बेहतर सम्मान भी हासिल कर रही हैं। उनका अगला लक्ष्य दिल्ली की टीम से जुड़कर नेशनल, इंटरनेशनल खेलना है।
दिल्ली में मिलता है पूरा सम्मान
मोहकमपुर के कृष्ण विहार निवासी अनीता रावत डीएवी से बीए प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। इन दिनों पेपर देने दून आई
अनीता को पवेलियन ग्राउंड में चल रहे गर्ल्स चैलेंज कप की जानकारी मिली तो वह यहां पहुंच गई।
शुक्रवार को अनीता ने देहरादून फुटबाल एकेडमी के खिलाड़ियों को फिजिकल ट्रेनिंग देने के साथ खेल के गुर भी सिखाए। इस दौरान अमर उजाला से अनीता ने कहा कि कई उपलब्धियों के बावजूद प्रदेश में मान नहीं मिला तो वह दिल्ली चली गईं। वहां गढ़वाल क्लब से खेल रही हैं।
अनीता ने कहा कि वह गर्ल्स खिलाड़ियों को पुरुषों के समान पूरा सम्मान मिलता है। बताया कि इस बार एक क्लब ने 15 हजार प्रतिमाह का ऑफर दिया है, जिस पर विचार कर रही हूं।
हालांकि, अनीता को मलाल है कि वह अपने प्रदेश की टीम से नहीं खेल पाएंगी, लेकिन उनका कहना है कि आगे बढ़ने के लिए दिल्ली टीम की तैयारी करना जरूरी है। प्रदेश में तो उन्हें फिलहाल फुटबाल की बदहाली बदलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती।
अनीता का सफर
वर्ष 2007: दून में विजय कैंट के समर कैंप से खेल की शुरुआत
वर्ष 2010: जार्डन में एएफसी अंडर 16 फुटबाल चैलेंज कप में गई भारतीय टीम में शामिल
वर्ष 2010: दो इंडिया कैंप किए, देश के 54 में से चुने गए 25 खिलाड़ियों में शामिल, प्लेइंग 11 में भी चुनी गई
वर्ष 2011: अंडमान निकोबार में स्कूल नेशनल प्रतियोगिता में पांच-पांच हजार के दो कैश अवार्ड, प्लेयर आफ टूर्नामेंट,
यंग प्रामिसिंग प्लेयर और फास्टेस्ट गोल का खिताब जीता (इस प्रतियोगिता के एक मैच में उत्तराखंड की टीम 12-0 से जीती थी, जिसमें से छह गोल अनीता ने किए थे)
वर्ष 2013: मलेशिया में अंडर 19 एएफसी चैलेंज कप क्वालीफाइंग फाइनल में उजबेकिस्तान के खिलाफ एकमात्र
विजयी गोल
वर्ष 2013: दिल्ली गईं, वहां गढ़वाल क्लब से जुड़ी
पिता हैं खेल के आदर्श
अनीता के पिता विमल सिंह राणा आर्मी के लिए खेलते थे। उन्हें देखकर ही अनीता में खेल की भावना जगी। 2007 में महिंद्रा ग्राउंड में लगे विजय कैंट के समर कैंप से अनीता ने खेल शुरू किया। कुछ समय बाद अनीता ने कैंट ब्ल्यू क्लब ज्वाइन किया, जिससे कुछ स्थानीय लोग उनसे खफा भी हो गए। लेकिन तमाम विरोधों और दुश्वारियों के बावजूद अनीता ने संघर्ष किया और आज दिल्ली में चमक बिखेर रही हैं।