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संसद में काम कब होगा

Tue, 11 Aug 2015 07:30 PM IST
नई दिल्ली
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लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा पिछले हफ्ते 25 कांग्रेस सांसदों के निलंबन के बावजूद सदन में हो रहे हंगामे में कोई फर्क नहीं पड़ा है, जिससे मानसून सत्र के बिना किसी कामकाज के खत्म हो जाने के आसार दिख रहे हैं। ललित मोदी मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तथा व्यापम घोटाले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के इस्तीफे की मांग पर अड़ी कांग्रेस चाहे लाख पिछली संसद में भाजपा के रुख का हवाला दे, लेकिन रोज-रोज स्पीकर की आसंदी के पास जाकर नारेबाजी और हंगामा करने वाला उसका यह व्यवहार जिम्मेदाराना नहीं कहा जा सकता।
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यह स्थिति खुद कांग्रेस के लिए भी ठीक नहीं है, क्योंकि समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव के बाद अब बीजू जनता दल के सांसदों ने भी उसके रुख पर ऐतराज किया है; यदि इसी तरह विपक्षी दल उससे अलग होते गए, तो आगे उसके लिए और मुश्किल हो जाएगी। अपने इस रुख से तो वह सदन के भीतर अपनी बात कहने के मौके से भी हाथ धो रही है।

हैरानी की बात यह है कि मानसून सत्र में अब मुश्किल से दो दिन रह गए हैं, लेकिन एनडीए सरकार के प्रबंधक भी बीच का कोई रास्ता नहीं निकाल सके हैं। वह संसद का कामकाज सुचारु रूप से चलाना चाहते हैं या सिर्फ कांग्रेस को अलग-थलग करना चाहते हैं! क्या सरकार के प्रबंधकों को इस बात पर फिक्रमंद नहीं होना चाहिए कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में निर्णायक बहुमत हासिल करने के बावजूद वे सदन को चला नहीं पा रहे हैं। हैरानी की बात नहीं है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक हुए चार संसद सत्रों में मौजूदा मानसून सत्र सबसे कम उत्पादक होने जा रहा है।
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वस्तुतः दुनिया के दूसरे बड़े लोकतंत्रों की ओर देखें, तो पता चलता है कि अमेरिकी सीनेट में जहां एक वर्ष में औसतन 180 दिन, कांग्रेस में 126 दिन, ब्रिटेन के हाउस ऑफ कामंस में 130 दिन और फ्रांस की नेशनल एसेंबली में 149 दिन बैठकें होती हैं, वहीं भारत में एक वर्ष में संसद की कुल 80 बैठकें ही हो पाती हैं। यह विडंबना ही है कि चार दिन बाद देश आजादी की अड़सठवीं वर्षगांठ मनाएगा और हम दुनिया के सामने अपनी संसद का ऐसा चेहरा प्रस्तुत कर रहे हैं।
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