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ब्रिटेन में फिर कैमरन

Fri, 08 May 2015 07:47 PM IST
नई दिल्ली
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ब्रिटेन के चुनाव में संसद के त्रिशंकु होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन इसमें सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी पिछली बार की तुलना में ज्यादा मजबूती से लौटी है, तो यह उसके नेता डेविड कैमरन के प्रति मतदाताओं के भरोसे का ही ठोस सुबूत है। इसी तरह लेबर पार्टी के पीछे रहने से जहां एड मिलिबैंड के सत्ता में आने का सपना चूर-चूर हो गया है, वहीं लिबरल डेमोक्रेटिक को भी करारी शिकस्त मिली है, जिसके पीछे कैमरन की पार्टी की सक्रियता का ही हाथ बताया जाता है।
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इस चुनाव में उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण घटनाक्रम अलबत्ता एसएनपी (स्कॉटिश नेशनल पार्टी) का अभूतपूर्व प्रदर्शन रहा है; उसने स्कॉटलैंड में कुल 59 में से 56 सीटें जीती हैं, जबकि पिछले चुनाव में अपने घर में उसे महज छह सीटें मिली थीं! यही नहीं, वहां एसएनपी की बीस साल की छात्रा ने दिग्गज राजनेता को पछाड़कर साढ़े तीन सौ वर्षों बाद सबसे कमउम्र सांसद होने की उपलब्धि हासिल की है। ऐसे में 'एकजुट ब्रिटेन' का जुमला उछाल रहे कैमरन के लिए स्कॉटलैंड एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

कैमरन की आर्थिक नीतियों के प्रति ब्रिटेन के निम्न और निःशक्त वर्ग में क्षोभ था, जबकि पिछले साल हुए जनमत सर्वेक्षण में स्कॉटलैंड की पैंतालीस फीसदी आबादी ने ब्रिटेन से अलग होने की जो इच्छा जताई थी, उससे लग रहा था कि ब्रिटेन के विखंडन की आशंका की कीमत कैमरन को चुकानी पड़ सकती है। पर नतीजे बताते हैं कि ब्रिटेन को आर्थिक तरक्की के रास्ते पर ले जाने की उनकी प्रतिबद्धताओं ने मतदाताओं को कायल किया है।
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यूरोपीय संघ के तौर-तरीके के प्रति सख्ती जताकर भी कैमरन ने देश में एक मजबूत नेता की छवि बनाई थी, और इस जीत के बाद उससे रिश्ता तय करने के मामले में वह और अधिकार के साथ आगे बढ़ेंगे। इस जीत के बाद केवल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में ही नहीं, अपनी पार्टी के भीतर भी कैमरन एक शक्तिशाली व्यक्तित्व बनकर उभरे हैं। लेकिन अर्थव्यवस्था को गति देने, रोजगार बढ़ाने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा को मानवीय चेहरा प्रदान करने और जलवायु परिवर्तन पर ठोस काम करने के लिए अब उन्हें सक्रियता दिखानी होगी।
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