हिम्मते मर्दा तो मदद ए खुदा। शहर चाहे कितना भी छोटा हो, माहौल कितना भी पिछड़ा हो और राह में भले ही हजारों रुकावटे हों, अगर ख्वाब ऊंचे हैं और इरादा पुख्ता है तो मंजिल मिल ही जाती है।
बरेली जैसी छोटी जगह से मिस वर्ल्ड के ताज और बॉलीवुल में ढेरो सफल फिल्में करने वाली प्रियंका चोपड़ा से बेहतर इस बात का उदाहरण भला कौन होगा। प्रियंका जैसा ही जज्बा आगरा में आयोजित फेम मिस नॉर्थ इंडिया प्रतियोगिता की कई प्रतिभागियों का है।
ग्रांड फिनाले से पहले लुक को फाइनल टच देतीं मॉडल्स
इस प्रतियोगिता में शामिल कई ऐसी प्रतिभागी हैं जिन्होंने छोटे शहरों में रहकर भी ऊंचे सपने देखे हैं और आज मॉडलिंग में अपना करियर बनाने की राह पर ल पड़ी हैं।
आगरा के छोटे से कस्बे एत्मादपुर की रहने वाली नव्या उपाध्याय अपने सपनों को पूरा करने के लिए इस प्रतियोगिता में जी-जान से जुटी हैं।
नव्या के अनुसार, "मैं आगरा के छोटे से कस्बे में रहती हूं जहां लोग मॉडलिंग जैसे पेशे के बारे में सोच भी नहीं सकते। इस प्रतियोगिता की तैयारी के दौरान मुझे छोटी-छोटी चीजों की खरीदारी के लिए रोज 15 किलोमीटर का सफर तय करके शहर तक आना पड़ता है।"
आज मिस नॉर्थ इंडिया प्रिंसेज का फैसला
छोटे शहरों में न केवल सुविधाओं का अभाव प्रतिभागियों के लिए चुनौती है बल्कि लोगों की मानसिकता भी उनके लिए मुश्कलों का सबब होती हैं।
बरेली की रहने वाली गुरुषा गांधी बताती हैं, "कई बार ऐसा लगता है कि मेरे आस-पड़ोस के लोगों को मॉडलिंग में मेरी रुचि चौंकाती है। कई बार मुझे व मेरी मां को इस बात पर ताने भी सुनने को मिलती हैं पर मैं किसी की सोच नहीं बदल सकती हूं। मैं जो हूं, वो हूं।"
आज शाम ग्रैंड फिनाले के दौरान ताज किसे भी मिले पर इनके जज्बे को सलाम है।