केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासीन मलिक का पासपोर्ट रद्द करने पर विचार कर रही है। केंद्र ने कहा है कि वह मलिक की पाकिस्तान यात्रा के दौरान 26/11 के मुख्य आरोपी हाफिज सईद के साथ हुई मुलाकात के प्रति पूरी तरह सचेत है। मलिक को श्रीनगर में फिलहाल नजरबंद रखा गया है।
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को कहा कि मलिक पर जो भी कार्रवाई होनी है, वह जम्मू-कश्मीर पुलिस करेगी। मलिक का पासपोर्ट रद्द करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर केंद्र की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
गृहमंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मलिक ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा प्रमुख के साथ मंच साझा कर कूटनीति के लिहाज से गलत काम किया है। इसकी पूरी तहकीकात चल रही है कि मलिक सईद के साथ किन हालात में मिले। इसके बाद उन पर उचित कार्रवाई होगी। सूत्रों के मुताबिक भारत विरोधी गतिविधि के लिए मलिक का पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है।
मलिक शनिवार को ही पाकिस्तान से दिल्ली लौटे थे। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का सामना कर रहे मलिक ने यह बयान भी दिया था कि उनका विरोध करने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने गांधी जी की हत्या की थी। मलिक ने अपनी सफाई में कहा है कि वह पाकिस्तान अपनी पत्नी से मिलने निजी यात्रा पर गए थे। संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के विरोध प्रदर्शन में उन्हें आमंत्रित किया गया था। उन्हें नहीं मालूम था कि उस मंच पर हाफिज सईद भी आने वाले थे।
परिवार को नहीं सौंपा जाएगा अफजल का शव
केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद हमले के दोषी अफजल गुरू के शव को उसके परिवार को सौंपे जाने से इंकार किया है। केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि शव को जेल के नियमों के मुताबिक दफनाया गया है और उसके शव को सौंपे जाने का कोई नियम नहीं है।
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, अफजल का परिवार और कई राजनीतिक पार्टियां तिहाड़ जेल में 9 फरवरी को फांसी पर लटकाए गए आतंकी के शव को लौटाने की मांग कर चुके हैं। इस संदर्भ में उमर ने पिछले महीने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था। इसके साथ ही उन्होंने मकबूल बट के शव को भी लौटाने की अपील की थी। गृहमंत्री ने बताया कि अफजल का परिवार यहां आ सकता है और तिहाड़ जेल में उसकी कब्र पर प्रार्थना कर सकता है।