नरेंद्र मोदी काशी में ‘राहुल’ को अपना सारथी बना लेंगे, यह उसने सोचा भी न था। गुरुवार को मोदी अपने ‘रोड शो’ के दौरान जिस सफारी कार पर सवार थे, उसे फुटपाथ पर मोमोज बेचकर पेट पालने वाला यही गरीब युवक चला रहा था।
एलडी गेस्ट हाउस से चुनाव कार्यालय होते हुए बाबतपुर एयरपोर्ट के लिए विदा होने तक करीब पांच घंटे तक मोदी के सारथी के रूप में उनके साथ रहे राहुल की खुशी का ठिकाना नहीं है। उसके मुताबिक खचाखच भीड़ से पटी सड़कों से गुजरते हुए मोदी ने उससे मोहल्लों के नाम पूछे और रास्ते की दूरी भी जाननी चाही।
उस दौरान भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार के साथ बिताए क्षणों को उसी की जुबानी सुनिए।
राहुल चला रहा था मोदी की सफारी कार
बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस से मोदी जब रोड शो के लिए निकले तो उन्होंने पहले से तय बुलेट प्रुफ अंबेसडर कार में बैठने से मना कर दिया। प्रबंधन देखने वालों ने वीआईपी ड्यूटी में लगाई गई दूसरी सफारी कार को मोदी के लिए मंगाया, उसे राहुल चला रहा था।
शाम 6:05 पर उनका काफिला रोड शो के लिए निकला। मोदी ने सफारी पर सवार होते ही पहले उसका नाम पूछा। बीएचयू सिंहद्वार पहुंचने पर मोदी फिर राहुल से मुखातिब हुए।
बोले- कार्यालय तक जाने में कितना समय लगेगा। राहुल ने बताया कि सर, करीब 45 मिनट में हम लोग पहुंच जाएंगे। लेकिन इसके बाद जिस तरह समर्थकों का सैलाब उमड़ा। उससे सफारी बढ़ाने के लिए रास्ता बनाना कठिन होने लगा। मोदी भीड़ देख मुस्कुराते हुए अभिवादन करते चल रहे थे। इस दौरान वे राहुल से मोहल्लों के बारे में भी पूछते रहे।
'मोदी सर, पत्नी को फोन कर लूं'
जंगमबाड़ी में मोदी तब सफारी का शीशा खोलने के लिए मजबूर हो गए, जब एक विकलांग युवती उनसे मिलने के लिए शोर मचा रही थी। राहुल ने बताया कि उन्होंने मुझे गाड़ी रोकने का इशारा करते हुए शीशा खोला और उसका आवेदन पत्र पढ़ने लगे।
उसे भरोसा दिलाया कि समय आने दो, तकलीफों के बादल छंट जाएंगे। केंद्रीय चुनाव कार्यालय से बाबतपुर एयरपोर्ट जाते समय देर होने लगी तब राहुल ने मोदी को अपनी परेशानी भी बताई।
उसका कहना था कि सर, घर लौटने में मुझे बहुत रात हो जाएगी, आप कहें तो पत्नी को एक फोन कर दूं।
राहुल के पास मोदी की यादगार निशानी
मोदी ने कहा कि बता दो कि टीवी खोलकर बैठ जाए, लाइव आ रहा होगा। फिर राहुल ने अपनी पत्नी निशा और मां शोभा को बताया कि वह रोड शो में मोदी जी को साथ लेकर चल रहा है। टीवी खोलकर देख लो। आने में थोड़ी देर हो जाएगी।
राहुल सोनारपुरा में विजयनाथ मठ के पास अपने भाई गोलू के साथ फुटपाथ पर मोमोज बेचता है। उसने बताया कि तीन मई को उसे चुनाव में गाड़ी चलाने का काम मिला। वह जिस सफारी को चला रहा था वह मेनका गांधी के करीबी संजीव बलिदानी की थी।
काशी में नरेंद्र मोदी का सारथी बनने वाले राहुल के पास उनकी कुछ यादगार निशानी भी छूट गई है। राहुल ने बताया कि जिस टावेल का वे इस्तेमाल कर रहे थे, वह सफारी में ही छूट गई। इसके अलावा पानी की एक बॉटल मोदी ने उसे दी। कहा कि हिमालय यात्रा के दौरान मैं इसी बाटल को लेकर जाता हूं। तुम सफर में अपने साथ रख सकते हो।
'गुजरात पुलिस के कहने पर बदली गाड़ी'
बीएचयू हेलीपैड पर नरेंद्र मोदी को वाराणसी पुलिस एवं प्रशासन की तरफ से बुलेटप्रूफ वीआईपी कार उपलब्ध कराई थी। मोदी इस कार से केवल बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस तक ही गए। ऐसा उन्होंने सुरक्षा कारणों से किया या फिर किसी अन्य कारण से, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
मोदी की फ्लीट के इंचार्ज सीओ ट्रैफिक केपी गुप्ता का कहना है कि मोदी के काफिले में चलने वाली गाड़ियों की जांच बीडीएस से कराई गई थी। जिला पुलिस के अलावा गुजरात पुलिस ने भी जांच की थी।
गुजरात पुलिस के एसपी स्तर के अधिकारी के कहने पर ही मोदी की गाड़ी और चालक बदला गया। उन्हें बताया गया कि चालक गुजरात का है।