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जब बैंगलोर की सड़क पर दिखा खतरनाक एनाकोंडा

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एनाकोंडा को दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाला एक निहायत ही खतरनाक सांप प्रजाति का माना जाता है।लेकिन एनाकोंडा से सुकून भी मिल सकता है, यह बैंगलुरू के निवासियों ने बीते हफ्ते समझा।
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भारत की प्रौद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले इस शहर के नगर निगम को संदेश देने के लिए कला का सहारा लेना पड़ा और इसमें एनाकोंडा का इस्तेमाल किया गया। संदेश यह था कि बैंगलुरू की सड़कों पर मौजूद तक़रबीन 20,000 गड्ढे एनाकोंडा से कम खरनाक नहीं हैं।

एनाकोंडा पर विवाद

कलाकार पुष्पराज एम ने थर्मोकोल और प्लास्टर ऑफ पेरिस से एनाकोंडा बनाया और उसे एक बड़े गड्ढे में लगा दिया। शहर की व्यस्त सड़क पर बना यह एनाकोंडा लोगों को डराने के लिए काफी था।

पुष्पराज के पांच सहयोगियों ने इसमें उनकी मदद की। बीच सड़क पर बने इन एनाकोंडा पर विवाद इसलिए भी हुआ कि नगर निगम का चुनाव होने वाला है।

पुष्पराज ने कहा, “एक गैर सरकारी संगठन ने लोगों में जागरुकता बढ़ाने के लिए कुछ करने का प्रस्ताव हमें दिया तो एनाकोंडा का विचार सामने आया। हमने उसे ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए उसके हाथ भी जोड़ दिया।”

बैंगलुरू फाउंडेशन ने दिया प्रस्ताव

सांसद राजीव चंद्रशेखर की पहल पर बने गैर सरकारी संगठन नम्मा बैंगलुरू फाउंडेशन ने यह प्रस्ताव दिया और पुष्पराज ने अपने सहयोगियों के साथ मिल कर महज 24 घंटों में उसे सच कर दिखाया। पुष्पराज चित्र कला परिषद के लोक कला में ग्रैजुएट और बैंगलुरू विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रेजुएट हैं।

उन्होंने कहा, “हम बैंगलुरू की बदहाल सड़कों की ओर लोगों का ध्यान खींचना चाहते थे। बारिश में इन गड्ढों में पानी भर जाने से डेंगू और दूसरे रोगों की आशंका बढ़ गई। प्रशासन ने कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया।

हमने इस ओर ध्यान खींचने के लिए कला का सहारा लेने का फैसला किया।” वृहत बैंगलुरू महानगर पालिका के प्रमुख विजय भास्कर टीएम ने इस पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, “ये कलाकृतियां नगर निगम के लोगों का ध्यान खींचने का अच्छा ज़रिया हैं। यह एनाकोंडा मुझे काफ़ी अच्छा लगा।

सड़कों पर बने गड्ढों का मुद्दा तो है ही, हम इस ओर क़दम उठा रहे हैं।” इसके लगभग छह हफ़्ते पहले कलाकार बादल ननजुंदस्वामी ने बैंगलुरू की सड़कों पर बने इन गड्ढों की ओर लोगों का ध्यान खींचने के लिए एक मगरमच्छ बनाया था।
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मगरमच्छ का भी लिया सहारा

चामराजेंद्र एकेडेमी ऑफ विजुअल आर्ट्स से कला की पढ़ाई करने वाले इस कलाकार ने कहा, “सार्वजनिक जगह पर बने एक नल से बीते तीन महीनों तक लगातार पानी टपकता रहा और इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इस वजह से कुछ लोगों को चोटें भी आईं। इसके बाद मैंने मगरमच्छ का सहारा लिया।” कला निर्देशक शशिधर हड़पा ने इस मगरमच्छ का इस्तेमाल किया था।

ननजुंदस्वामी ने अपनी जेब से छह हजार रुपए खर्च कर इसे गड्ढे में लगाया था। अगले दिन उस टपकते हुए नल को ठीक कर दिया गया।
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