आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है।
उन्होंने केजरीवाल को एक साल का बच्चा बताते हुए कहा कि कुछ लोग उसे ड्राइविंग सीट पर बैठाने को आतुर हैं। केजरीवाल के साथ-साथ रविशंकर ने गठबंधन सरकार पर भी सवाल खड़े किए हैं। आध्यात्मिक गुरु ने गठबंधन सरकार को 'खिचड़ी' करार दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे बचने का एक ही तरीका है कि क्षेत्रीय पार्टियों को लोकसभा चुनावों में भाग ही नहीं लेने दिया जाए।
श्री श्री रविशंकर ने अपने ये विचार मुंबई में चल रही 'फर्स्ट स्पीकर सीरीज' में रखे। आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि गठबंधन सरकार देश की आर्थिक और सामाजिक नीति के लिए घातक है। इसलिए हमें ऐसी खिचड़ी नहीं चाहिए।
'केजरीवाल बंद करें बच्चों जैसी हरकतें'
श्री श्री रविशंकर ने दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की तुलना एक साल के छोटे बच्चे से कर दी।
उन्होंने कहा कि, 'अगर एक साल के छोटे से बच्चे को ड्राइवर की सीट पर बैठा दोगे तो क्या उसके पैर, ब्रेक और क्लच तक पहुंच पाएंगे'। आध्यात्मिक गुरु इतने पर ही नहीं रुके उन्होंने कहा कि कुछ केजरीवाल को ड्राइविंग सीट पर बैठाने के लिए आतुर हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि मैं केजरीवाल को पसंद करता हूं लेकिन उन्हें बच्चों जैसी हरकतें करना बंद कर देनी चाहिए।
शरद पवार के बयान पर रविशंकर ने ली चुटकी
शरद पवार के दो बार वोट डालने के बयान पर आध्यात्मिक गुरु ने चुटकी ली है।
श्री श्री रविशंकर ने कहा कि इस लिहाज से चुनाव आयोग को हर छह माह में चुनाव कराने चाहिए। कार्यक्रम के दौरान रविशंकर क्षेत्रीय दलों को लेकर अपनी नाराजगी छुपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय पार्टियां स्थिर सरकार के लिए एक रोड़ा है।
श्री श्री रविशंकर ने कहा कि सही मायने में क्षेत्रीय पार्टियों को विधानसभा चुनाव लड़वाना चाहिए और उन्हें लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने देना चाहिए।
'गठबंधन सरकार से अर्थव्यवस्था कमजोर'
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने गठबंधन सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार हमेशा डांवाडोल रहती है। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसी स्थितियों में डॉलर मजबूत होता है और भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है। इससे बचना है तो देश में मजबूत सरकार लानी होगी।
रविशंकर कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त सरकार लाने के प्रयास होने चाहिए। इसका एक ही उपाय है, ऐसी सरकार बने जो अपने बलबूते काम करे। क्षेत्रीय दलों की बैसाखियों पर चलने वाली सरकार अर्थनीति के लिए कामयाब साबित नहीं होती।