पूर्व कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने संप्रग सरकार के इशरत जहां केस में दूसरा हलफनामा दायर करने के फैसले को सही ठहराते हुए पी चिदंबरम का बचाव किया है। साथ ही उन्होंने इस मामले से दूरी बनाने के लिए तत्कालीन गृह सचिव जीके पिल्लई की आलोचना की है। हलफनामे पर विवाद पिल्लई के बयान के बाद ही शुरू हुआ है।
इशरत जहां केस में जब दूसरा हलफनामा दायर किया गया, तब मोइली ही कानून मंत्री थे। उनके मुताबिक दूसरा हलफनामा दायर करना जुर्म नहीं है। पहला हलफनामा आईबी और खुफिया इनपुट पर आधारित था, जबकि दूसरा जांच रिपोर्ट पर विचार के बाद दायर किया गया था। उन्होंने चिदंबरम का बचाव करते हुए कहा कि चिदंबरम कहते हैं कि इशरत और उसके साथी गुजरात आने पर खुफिया एजेंसियों के जाल में फंस गए थे। यह खुद में फर्जी एनकाउंटर की पुष्टि करता है।
मोइली के अनुसार पूर्व गृह सचिव अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। यह बहुत निंदनीय है। जब उनसे पूछा गया कि क्या हलफनामा निरीक्षण के लिए उनके मंत्रालय के पास आया था तो मोइली ने कहा कि उन्हें यह याद नहीं है। वैसे सामान्य तौर पर जब एडमिनिस्ट्रेटिव मिनिस्ट्री हलफनामे को अंतिम रूप दे देती है तो उसे कानून मंत्रालय या अटार्नी जनरल या किसी और के पास भेजना चाहिए।