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उधर चिताएं जलीं, इधर नेताओं की जुबान चली

Mon, 01 Jul 2013 03:33 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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उत्तराखंड त्रासदी में मारे गए लोगों की चिताएं अभी ठंडी नहीं हुई लेकिन इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच आज ट्विटर पर बयानबाजियों का सिलसिला चलता रहा।
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राहत कार्यों में बरती गई लापरवाही पर उत्तराखंड सरकार को आड़े हाथों लेते हुए भाजपा नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने आज दिन में ट्विट किया और राज्य सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड सरकार आपदा के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वाह नहीं कर पाई है। नाकाबलियत के कारण उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए।

सुषमा के ट्वीट के जवाब में सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने भी ट्वीट किया।

उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड की त्रासदी पर भाजपा राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा के बाद ना सुषमा स्वराज और ना अरुण जेटली ने राज्य का दौरा किया है, लेकिन ये राज्य सरकार की आलोचना जरूर कर रहे हैं।
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कांग्रेस के ही एक अन्य नेता अजय माकन ने ट्वीट किया है, प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों की चिताएं अभी ठंडी नहीं हुई। उत्तराखंड में आपदा प्रभावित कार्य में मदद करने के बजाय राजनीति करने की कोशिश की जा रही है।

सुषमा ने दिया जवाब

सुषमा स्वराज ने मनीष तिवारी के आरोपों के जवाब में भी ट्वीट किया। उन्होंने कहा है कि गृहमंत्री ने सार्वजनिक रूप से वीवीआईपी को उत्तराखंड जाने से मना किया था। उन्होंने कहा था कि हमारे उत्तराखंड जाने से बचाव कार्य प्रभावित होगा।

सुषमा ने कहा, 'गृहमंत्री ने यहां तक कहा था कि आपदा प्रभावित इलाकों में मुझे भी उतरने की इजाजत नहीं दी गई।' सुषमा ने कहा कि सच्चाई ये है कि गृहमंत्री को उन्होंने उत्तराखंड की त्रासदी के बारे में आगाह किया।

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प्रवक्ताओं में भी बयानबाजी
सुषमा स्वराज और मनीष तिवारी के बीच ट्विटर पर छिड़ी जंग का असर भाजपा और कांग्रेस के प्रवक्ताओं पर भी दिखा।

कांग्रेस प्रवक्ता भक्त चरण दास ने पूछा कि सुषमा और अरुण जेटली जिम्मेदार नेता माने जाते हैं लेकिन इतनी बड़ी घटना के बाद भी ये उत्तराखंड क्यों नहीं गए?

भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी इसके जवाब में कहा कि सुषमा स्वराज ने ही गृहमंत्री को उत्तराखंड की आपदा के बारे में आगाह किया था।

उन्होंने बताया कि आपदा के वक्त वे दिल्ली में ही थी और लगातार हालात पर नजर रखे हुए थी। लेखी ने कहा कि गृहमंत्री ने खुद नेताओं और मुख्यमंत्रियों को उत्तराखंड नहीं जाने को कहा था।
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