उत्तर प्रदेश में निजी चीनी मिलों ने राज्य सरकार के प्रोत्साहन पैकेज को खारिज करते हुए पेराई शुरू करने से साफ इनकार कर दिया है।
चीनी मिलों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा चीनी मिलों को दिया गया प्रोत्साहन नाकाफी है और उस पर मिलें पेराई शुरू करने की स्थिति में नहीं है।
हालांकि, मिलें राज्य सरकार के साथ मामले का समाधान निकालने के लिए आगे भी बातचीत को तैयार हैं। राज्य सरकार को 99 निजी चीनी मिलों में से 76 ने पेराई स्थगन का जो नोटिस दिया वह मौजूदा हालात में वापस नहीं लिया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मिलों को पेराई शुरू करने के लिए राहत की घोषणा करने के बाद उद्योग का यह रुख सामने आया।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में साफ किया कि राज्य सरकार ने चीनी मिलों को पांच मुद्दों के तहत जिस राहत की घोषणा की है उसमें मिलों को सही मायने में इंट्री टैक्स के रूप में 2.73 रुपये की राहत ही नई बात है।
राज्य सरकार ने परचेज टैक्स में छूट की बात कही है, यह तो पिछले सीजन में भी मिली थी। लेवी चीनी पर छूट भी पिछले सीजन में ही मिल गई थी।
वहीं सरकार की तरफ से पैकेज की स्थिति स्पष्ट नहीं है। जबकि शीरे पर राज्य सरकार के फैसले के बावजूद अभी तक सरकारी आदेश जारी नहीं हुए हैं। पिछले साल की स्थिति में मिलों को 3,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था और अभी भी पिछले साल का 2,400 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है।
जहां तक चीनी मिलों को ब्याज मुक्त कर्ज की बात है यह कितना और कब मिलेगा यह भी अभी साफ नहीं है। ऐसे में चीनी मिलें सरकार द्वारा निर्धारित 280 रुपये प्रति क्विंटल का गन्ना मूल्य देने की स्थिति में नहीं है। मिलें किसी भी कीमत पर 225 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रोत्साहन पैकेज के बाद भी भाव में 55 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर आएगा, जिसे मिलें नहीं उठा सकती हैं। ऐसे में यदि इसी तरह चीनी मिलें चलाई जाएं तो मार्च 2014 तक मिलों पर किसानों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान 15,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा 7 दिसंबर तक पेराई शुरू करने के अल्टीमेटम पर वर्मा ने बताया कि मिलें नो प्रॉफिट, नो लॉस पर हम पेराई शुरू करने को तैयार हैं लेकिन सरकार हमें उसके लिए प्रोत्साहन पैकेज जारी करे। यदि सरकार नो प्रॉफिट, नो लॉस पर स्वयं मिलें चलाना चाहती है तो वह इसके लिए भी तैयार हैं।
हालांकि, वर्मा ने यह स्पष्ट किया है मौजूदा समस्या का हल निकालने के लिए वह राज्य सरकार के साथ आगे भी बातचीत करने के लिए तैयार हैं। वर्मा का कहना है कि हम इस गतिरोध को तोड़ना चाहते हैं क्योंकि मौजूदा स्थिति सरकार, उद्योग और किसान किसी के भी हित में नहीं है।