केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के अभद्र बोल ने नब्बे के दशक के राम मंदिर आंदोलन के वक्त के उग्र बयानों की याद ताजा करा दी है।
रामजादे की सरकार या हरामजादे की सरकार की संज्ञा देकर निरंजन ने ढाई दशक बाद ऋतंभरा की कमी को पूरा करने का प्रयास किया है। लेकिन अभद्र बोल के कारण साध्वी मोदी सरकार के गले की फांस बन सकती हैं।
विपक्ष निरंजन को मंत्री पद से हटाने की मांग पर अड़ा है तो उत्तर प्रदेश के मिशन 2017 के मद्देनजर जातीय समीकरण को देखते हुए साध्वी को सरकार में बनाए रखना भाजपा की सियासी मजबूरी है। बताया जाता है कि विहिप नेता अशोक सिंहल के दबाव के चलते निरंजन को मंत्री बनाना पड़ा।