व्यापम घोटाले के सियासी भंवर में फंसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से खुद मामले की सीबीआई जांच के ऐलान के बाद पार्टी आलाकमान मामले को अब बंद मान रहा है।
लेकिन, दिल्ली दौरे पर आए शिवराज ने बुधवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात कर देश-दुनिया को संदेश देने के साथ पार्टी आलाकमान को भी संकेत दिया है कि वह फ्रंट फुट कर खेल रहे हैं, किसी के दबाव में नहीं।
सुषमा से उनकी मुलाकात को औपचारिक तौर पर विश्व हिंदी दिवस पर राज्य में होने वाले आयोजन का निमंत्रण देने का प्रायोजन बताया गया है। मगर इसे शिवराज की हिल चुकी सियासी नींव को कहीं न कहीं संभालने का प्रयास माना जा रहा है।
भविष्य की सियासत के लिए की मुलाकात!
सुषमा को उनका राजनीतिक संरक्षक माना जाता है। लेकिन, सवाल यह भी है कि
ललित मोदी विवाद में घिरीं सुषमा कैसे चौहान की कोई मदद कर पाएंगी।
बावजूद
इसके व्यापम घोटाले की सियासी आंच झेल रहे चौहान ने सीबीआई जांच के ऐलान के
बाद दिल्ली आकर महज विदेश मंत्री से मुलाकात की है। सुषमा से उनकी मुलाकात
को भविष्य की सियासत के रूप में देखा जा रहा है।
उधर, जबलपुर हाईकोर्ट
के राज्य सरकार की मामले की सीबीआई जांच कराने संबंधी अर्जी पर सुनवाई
नहीं करने के बाद चौहान ने कहा है कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय से भी
सीबीआई जांच की गुहार लगाएगी।
सियासी संकट में हैं शिवराज
उन्होंने कहा कि सीबीआई इस मामले की सही जांच
करके सच्चाई सामने लाए। शिवराज ने कहा कि लोकतंत्र में शासक जनता का सेवक
होता है।
सनद रहे कि सियासी रूप से संकट में फंसे शिवराज ने भाजपा आलाकमान
के दबाव के बाद व्यापम मामले की जांच सीबीआई से कराने का ऐलान
किया था।
इसके बाद से उनके सियासी पारी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।
सुषमा से उनकी मुलाकात को भी भविष्य की सियासत के रूप में देखा जा रहा है।