यूं तो शिवसेना केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार में साझीदार है, मगर सत्ता में सहयोगी होते हुए भी वह विपक्ष की भूमिका निभाती नजर आ रही है।
खासतौर से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए विभिन्न मुद्दों पर घिरी राज्य और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है।
चाहे ललित मोदी प्रकरण पर भाजपा और सरकार में अंदरूनी खींचतान का मामला हो या फिर पार्टी के बुजुर्गों का अपनों पर निशाना साधने का मामला, शिवसेना ने हर मौके पर भाजपा और सरकार को कटघरे में खड़ा कर परेशानी बढ़ाने की कोशिश की है।
हालिया मामला विवादों में घिरे महाराष्ट्र सरकार के दो मंत्रियों पंकजा मुंडे और विनोद तावड़े का है। शिवसेना ने इन दोनों ही मामलों में यह कह कर इन मंत्रियों के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है कि दोनों ही मंत्री सूबे के मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि तावड़े जहां फर्जी डिग्री मामले में विवादों में घिरे हैं, वहीं पंकजा 206 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों पर विपक्ष के निशाने पर हैं। सत्ता के साथ रह कर अपनी ही सरकार पर लगातार निशाना साधने की शिवसेना की रणनीति को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से मिले ‘सियासी धोखे’ की टीस से जोड़ कर देखा जा रहा है।