प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भले ही भारत-अमेरिका रिश्ते की नई बुनियाद रखी हो, मगर यह एक कड़वी सच्चाई है कि विज्ञान की दुनिया में अपना जबरदस्त योगदान देने वाले दोनों देशों के वैज्ञानिकों को वीजा के मामले में लालफीताशाही का शिकार होना पड़ रहा है।
दोनों देशों के वैज्ञानिकों को या तो वीजा नहीं मिल पा रहा है या फिर जटिल प्रक्रियाओं से दो-चार होने के बाद काफी देरी से वीजा मिल पा रहा है।
इस साल गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर मोदी के साथ मुख्य अतिथि रहे राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ ‘चाय पे चर्चा’ करने के बावजूद वीजा संबंधी रुकावटें दोनों देशों के रिश्तों में अभी तक उतनी गर्मी नहीं आ पाई है।
वीजा नियमों की जटिलताएं दुनिया की सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के बीच वैज्ञानिक योगदानों के मुक्त आवागमन में बाधा पहुंचा रही है।