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भाजपा नेतृत्व को नागवार गुजरी अपने सांसद की नसीहत

Tue, 21 Jul 2015 10:50 PM IST
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भ्रष्टाचार के मोर्चे पर विपक्ष के निशाने पर आई सरकार और भाजपा को अपने ही बुजुर्ग नेता शांता कुमार की नसीहत बेहद नागवार गुजरी है।
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पार्टी नेतृत्व ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के जरिए न सिर्फ व्यापम घोटाला मामले में अध्यक्ष अमित शाह को लिखी चिट्ठी के लीक होने पर एतराज जताया है, बल्कि मीडिया में संभल कर बोलने की भी नसीहत दी है।

एक अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तो यहां तक कह दिया कि शांता के दिल का दर्द भ्रष्टाचार के आरोप में सीबीआई जांच का सामना कर रहे हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के मामले में क्यों नहीं सामने आता।
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कार्यकर्ताओं का सिर शर्म से झुका

हालांकि पार्टी नेतृत्व की नाराजगी से बेपरवाह शांता ने न केवल शाह को चिट्ठी लिखने की बात स्वीकार की, बल्कि यह भी कहा कि वह चिट्ठी में कही गई अपनी बात पर अब भी कायम हैं।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम ने शाह को पत्र लिख कर कहा था कि व्यापम घोटाले से के सिर्फ राजग सरकार की साख को धक्का लगा है, बल्कि इससे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का सिर शर्म से झुक गया है।

इस पत्र में शांता ने मूल्यों की राजनीति की जगह सत्ता की राजनीति के चलन पर दुख जताते हुए लोकपाल की तर्ज वपर राज्यों में एथिक्स कमेटी बनाने की मांग की है।

मिली नसीहत की खुराक

यह चिट्ठी ऐसे समय में लिखी गई है जब पार्टी और सरकार भ्रष्टाचार के एकाएक कई मामलों के उजागर होने से विपक्ष के निशाने पर है।

शांता की व्यापम सहित भ्रष्टाचार केअन्य मामलों के प्रति पार्टी के अपनाए जा रहे दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली पर खरी खरी पार्टी नेतृत्व को रास नहीं आई है।

नाराज पार्टी ने शांता को भी नसीहत की खुराक देते हुए इशारों-इशारों में भविष्य में इस तरह की हरकत स्वीकार न किए जाने का संदेश दे दिया है।

कांग्रेसी प्रोपेगेंडा के अभाव में शांता!

लेटर बम केमीडिया के जरिए सामने आने और विपक्ष को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा हाथ लगने के बाद पार्टी अध्यक्ष के निर्देश पर नड्डा ने शांता से बातचीत की।

इस बातचीत में नड्डा ने नेतृत्व की ओर से पत्र लीक किए जाने पर नाराजगी जाहिर की और उन्हें मीडिया में संभल कर बोलने की नसीहत दी। इसके बाद सरकार के मंत्रियों ने शांता के खिलाफ मोर्चा खोला।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि पार्टी उनके बयान से सहमत नहीं है। शांता कांग्रेसी प्रोपेगंडा के प्रभाव में आ गए हैं।
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वीरभद्र मामले में दिल का बोझ हल्का क्यों नहीं करते?

वहीं दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि ''शांता कुमार पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी में उनका एक लंबा अध्याय है। उनके पत्र का पार्टी अध्यक्ष जवाब देंगे।

मगर मुझे दुख इस बात का है कि व्यापम मामले में दिल का दर्द सामने रखने वाले शांता वीरभद्र मामले में दिल का बोझ हल्का क्यों नहीं करते?''

वहीं शांता कुमार ने कहा कि ''हां, मैंने व्यापम मामले में अमित शाह को पत्र लिखा है। मैं अब भी अपनी बात पर कायम हूं। मैं जनसंघ के समय से भाजपा में हूं और मैंने अपने और कार्यकर्ताओं के दिल की बात लिखी है।''
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