वित्त मंत्रालय को सौंपी गई सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट से कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि सिर्फ कृषि मंत्रालय की वेबसाइट को ही गौर से देख लिया जाए तो साबित हो जाएगा कि वेतन वृद्धि का प्रस्ताव तैयार करते वक्त कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों का भी ध्यान नहीं रखा गया।
इंटरनेशनल लेबर कांफ्रेंस की ओर से न्यूनतम वेतन के लिए तय मानक को भी दरकिनार किया गया है। इसके विरोध में केंद्रीय कर्मचारियों ने आंदोलन की घोषणा कर दी है और 27 नवंबर को सभी केंद्रीय कार्यालयों में विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है।
कर्मचारियों का दावा है कि कृषि मंत्रालय की वेबसाइट पर वर्ष 2015 में गेहूं, दाल, चावल जैसी खाद्य सामग्रियों के मूल्य के आधार पर गणना की जाए तो न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये बनता है, जबकि सातवें वेतन आयोग ने 18 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की सिफारिश की है।
इसके अलावा इंटरनेशनल लेबर कांफ्रेंस के तय मानक के अनुसार भी न्यूनतम वेतन 27 हजार रुपये होना चाहिए। सिर्फ इतना ही नहीं, सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में न्यूनतम और अधिकतम वेतन के अंतर को भी बढ़ाया गया है, जिसका कर्मचारी विरोध करते हैं।