फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महान वैज्ञानिक बोले, नहीं तो मिट जाएगा इंसान का नामोनिशान

विज्ञापन
विज्ञापन
स्टीफन हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए पृथ्वी को छोड़कर अंतरिक्ष में कहीं और बसेरा तलाशना होगा।
विज्ञापन


मानव जाति को ऐसा 1000 साल के अंदर करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो मानव जाति का नामोनिशान मिट सकता है। हॉकिंस ने कहा है कि मानव जाति को अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए अंतरिक्ष में जाना होगा।

उन्होंने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि अगले 1000 साल तक मानव जाति पृथ्वी से पलायन किए बगैर सुरक्षित रह सकती है। हॉकिंस ने ये बातें सिडनी ओपेरा हाउस में आयोजित वार्ता में कही।
विज्ञापन


स्टीफन हॉकिंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय से मानव जाति को खतरे की चेतावनी दी है। साथ ही मानव जाति को बचाने के लिए किसी दूसरे प्लेनेट की तलाश करने को कहा है।

होलोग्राफिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

इस वार्ता में हॉकिंस की उपस्थिति टेक्नोलॉजी के सहारे दर्ज हुई। हॉकिंस कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अपने ऑफिस में ही बैठे रहे और वहीं से सिडनी ओपेरा हाउस में हुई आयोजन में हिस्सा लिया।

इसके लिए होलोग्राफिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए हॉकिंस की 3डी इमेज सिडनी ओपेरा हाउस में पहुंचाई गई।

अपने लेक्चर के अंत में हॉकिंस ने उन्हें सुन रहे सभी लोगों को उत्साहित करने के लिए कहा कि मानव जाति को अब सितारों की ओर देखने की जरूरत है, न कि अपने पैरों के नीचे।

देखें पूरा वीडियो-

स्टीफन हॉकिंग की गजब दास्तां

विश्व प्रसिद्ध महान वैज्ञानिक और बेस्टसेलर रही किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' के लेखक स्टीफन हॉकिंग ने शारीरिक अक्षमताओं को पीछे छोड़ते हु्ए यह साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है।

हमेशा व्हील चेयर पर रहने वाले हॉकिंग किसी भी आम इंसान से इतर दिखते हैं। कम्प्यूटर और विभिन्न उपकरणों के ज़रिए अपने शब्दों को व्यक्त कर उन्होंने भौतिकी के बहुत से सफल प्रयोग भी किए हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ केम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रेफ़ेसर रहे स्टीफ़न हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बढ़े भौतकशास्त्रियों में होती है। उनका जन्म इंग्लैंड में आठ जनवरी 1942 को हुआ था।

'परिवार और दोस्तों के बिना कुछ नहीं'

यह पूछने पर कि क्या अपनी शारीरिक अक्षमताओं की वजह से वह दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक बन पाए, हॉकिंग कहते हैं, ''मैं यह स्वीकार करता हूँ मैं अपनी बीमारी के कारण ही सबसे उम्दा वैज्ञानिक बन पाया, मेरी अक्षमताओं की वजह से ही मुझे ब्रह्माण्ड पर किए गए मेरे शोध के बारे में सोचने का समय मिला। भौतिकी पर किए गए मेरे अध्ययन ने यह साबित कर दिखाया कि दुनिया में कोई भी विकलांग नहीं है।''

हॉकिंग को अपनी कौन सी उपलब्धि पर सबसे ज्यादा गर्व है? हॉकिंग जवाब देते हैं ''मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के लिए खोले और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।''

हॉकिंग के मुताबिक यह सब उनके परिवार और दोस्तों की मदद के बिना संभव नहीं था।
विज्ञापन

इच्छामृत्यु की वकालत?

यह पूछने पर कि क्या वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं हॉकिंग कहते हैं, ''लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूँ।''

मरने के अधिकार जैसे विवादास्पद मुद्दे पर हॉकिंग बीबीसी से कहते हैं, ''मुझे लगता है कि कोई भी व्यक्ति जो किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित है और बहुत ज्यादा दर्द में है उसे अपने जीवन को खत्म करने का अधिकार होना चाहिए और उसकी मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह की मुकदमेबाजी से मुक्त होना चाहिए।''

स्टीफन हॉकिंग आज भी नियमित रूप से पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय जाते हैं, और उनका दिमाग आज भी ठीक ढंग से काम करता है।

ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में उन्होंने अहम योगदान दिया है। उनके पास 12 मानद डिग्रियाँ हैं और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें