कथावाचक आसाराम को ‘झांसाराम’, ‘बाप नंबरी तो बेटा दस नंबरी’ आदि उपनाम दिए जाने से विचलित तथाकथित संत की मीडिया पर अंकुश लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है।
यौन उत्पीड़न के आरोप में 30 अगस्त को गिरफ्तार किए जाने के बाद से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ओर से हर रोज आसाराम पर विशेष कार्यक्रम दिखाए जाने से दुखी आसाराम ने मीडिया पर लगाम लगाने का अदालत से अनुरोध किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया पर अंकुश से इंकार करते हुए मीडिया को सलाह दी कि वह आसाराम की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरते।
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने आसाराम की याचिका पर सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि इस समय हम आपकी याचिका पर विचार नहीं कर सकते।
समाचारों के साथ छेड़छाड़ को लेकर शिकायत
साथ ही अदालत ने कहा कि यदि 72 वर्षीय आसाराम भविष्य में मीडिया की खबरों से प्रभावित महसूस करें तो वह उसके समक्ष फिर से आ सकते हैं।
आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने समाचार चैनलों की खबरों में इस्तेमाल की गई कुछ पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी शिकायत समाचारों के साथ छेड़छाड़ को लेकर है। उन्होंने कहा कि वे मीडिया की खबरों के खिलाफ नहीं हैं। उन्हें सही तरीके से रिपोर्टिंग होने पर कोई परेशानी नहीं है।