गोरक्षनाथ पीठ के महन्त अवेद्यनाथ ब्रह्मलीन हो गए। शुक्रवार की रात गोरक्षनाथ चिकित्सालय में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 95 वर्ष के थे। इससे पहले शाम को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल से उन्हें यहां लाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व गृहराज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सहित कई विशिष्टजन उनके अंतिम दर्शन के लिए शनिवार को गोरखपुर आ रहे हैं।
सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत पर महन्त अवेद्यनाथ को 14 जुलाई को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 सितंबर को उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलने पर गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी और गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ वहां पहुंच गए। शुक्रवार की सुबह महन्त अवेद्यनाथ को गोरखपुर लाने का निर्णय लिया गया। शाम पौने छह बजे एयर एंबुलेंस से उन्हें यहां लाया गया। एयरपोर्ट से उन्हें गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय ले जाया गया। मंदिर की ओर से रात में उनके ब्रह्मलीन हो जाने की जानकारी दी गई।
महन्त अवेद्यनाथ के देहावसान की खबर मिलते ही शहर भर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके सम्मान में शहर के स्कूल और कॉलेज आज बंद रहेंगे। सर्राफा एसोसिएशन ने दो दिनों तक बाजार बंद रखने की घोषणा की है।
अंतिम दर्शन आज, कल समाधि
शनिवार सुबह आठ बजे से मंदिर परिसर में महन्त अवेद्यनाथ के अंतिम दर्शन किए जा सकते हैं। रविवार को मंदिर परिसर में उनके गुरु ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ की समाधि के पास ही उन्हें समाधि दी जाएगी।
कर्मभूमि पर अंतिम सांस लेने की इच्छा
मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि महन्त अवेद्यनाथ पूर्व में ही बीमारी के दौरान अपनी कर्मभूमि पर अंतिम सांस लेने की इच्छा जता चुके थे। उधर मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने भी उनकी हालत को लेकर चिंता जताई थी। उनकी इस इच्छा के चलते ही उन्हें वापस गोरखपुर लाने का फैसला किया गया।