जम्मू-कश्मीर में काफी माथापच्ची के बाद बनी भाजपा और पीडीपी सरकार का भविष्य मुश्किलों में घिरता दिख रहा है। इसकी वजह बना है पीडीपी का एक फैसला। जम्मू भाजपा के विरोध के बावजूद कश्मीर की नई मुफ्ती सरकार ने शनिवार रात कश्मीरी अलगाववादी नेता मशरत आलम को रिहा कर दिया।
इसके बाद से भाजपा के स्थानीय नेताओं ने गठबंधन को लेकर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। हालत ये हो गई कि रविवार को इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई है। जिसमें मुफ्ती के फैसले को लेकर अहम फैसला हो सकता है।
दरअसल, मशरत आलम के खिलाफ कई गंभीर आरोप हैं। उस पर प्रदेश में हालात खराब करने जैसे दर्जनों मामले दर्ज हैं और उसकी गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा की गई थी। मशरत के छोड़ने का भाजपा ने विरोध किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि ऐसे फैसले से गठबंधन पर असर पड़ सकता है।
'मुफ्ती भारतीय हैं या नहीं?'
मुख्यमंत्री बनते ही मुफ्ती मोहम्मद सईद के विवादित बयान को लेकर भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सवाल उठाए थे। साथ ही उन्होंने ऐसे बयानों को निंदनीय करार दिया था। अब इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। मामला आरएसएस तक पहुंच गया है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने अपने मुखपत्र 'ऑर्गनाइजर' में प्रकाशित एक लेख के जरिए भारतीय जनता पार्टी से कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से पूछे कि वह भारतीय हैं या नहीं?
लेख के मुताबिक, पाकिस्तान और आतंकियों को राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव के
लिए धन्यवाद देकर मुफ्ती दोहरे मापदंड नहीं अपना सकते क्योंकि शिकारी और
खरगोश दोनों के साथ नहीं चल सकते। ‘स्पार्किंग कंट्रोवर्सी’ नामक यह लेख
पूर्व सीबीआई निदेशक जोगिंदर सिंह ने लिखा है।
कश्मीर घाटी छोड़ने
को मजबूर किए गए 3.70 लाख हिंदुओं और सिखों की दुर्दशा के लिए लेख में भारत
सरकार की आलोचना भी की गई है। साथ ही कहा गया है कि इन लोगों के बारे में
फैसला लेने के लिए सरकार के पास इच्छा शक्ति होनी जरूरी है।
आपको बता दें कि भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार बनने के तुरंत बाद ही एक विवादित बयान में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पाकिस्तान, आतंकियों और अलगाववादियों को श्रेय दिया था। जिसको लेकर भाजपा आलाकमान और सरकार को संसद में सफाई देनी पड़ी थी।
शिवसेना ने भी साधा था निशाना
अब इसी मुद्दे को लेकर आरएसएस की ओर से निशाना साधा गया है। आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर में सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह ने भाजपा से पूछा है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद से पूछना चाहिए कि आखिर वह भारतीय हैं या नहीं।
वहीं जोगिंदर सिंह ने अपने लेख में लिखा है कि जिन हिंदुओं और सिखों को कश्मीर घाटी छोड़ने पर मजबूर किया गया, आखिर उनके बारे में सरकार की योजना क्या है? क्या नई सरकार उन्हें वापस लाने की इच्छा शक्ति रखती है?
इससे एक दिन पहले भाजपा के एक और सहयोगी शिवसेना ने भी पीडीपी से भाजपा के गठबंधन को लेकर निशाना साधा था। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय के जरिए मुफ्ती मोहम्मद सईद पर निशाना साधा और उन्हें 'गीदड़ की औलाद' कह दिया। वहीं शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा था कि पीडीपी के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाने वाली भाजपा को संभलकर रहने की जरूरत है।