मथुरा जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर पहली बार कमल खिल गया। गुरुवार को हुए मतदान में भारतीय जनता पार्टी समर्थित ममता चौधरी ने सात मतों से जीत हासिल की और उन्हें निर्वाचित घोषित किया गया। दूसरे स्थान पर बसपा समर्थित उम्मीदवार ललित शर्मा रहे। तीन वोटों के साथ सपा की सुनीता नौहवार तीसरे स्थान पर रहीं।
गुरुवार को कलक्ट्रेट में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान हुआ। इसमें मथुरा जिला पंचायत के लिए निर्वाचित 38 सदस्यों ने मतदान किया। दोपहर सवा तीन बजे मतगणना के बाद आए नतीजों में ममता चौधरी को विजयी घोषित किया गया। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता चौधरी लक्ष्मीनारायण की पत्नी ममता चौधरी को 38 में से 21 मत मिले।
दूसरे स्थान पर बसपा समर्थित उम्मीदवार पूर्व मंत्री श्याम सुंदर शर्मा और मांट विधायक के पुत्र ललित शर्मा रहे। उन्हें 14 मत मिले। सपा समर्थित उम्मीदवार जिला सहकारी बैंक चेयरमैन जगदीश नौहवार की पत्नी सुनीता नौहवार को 38 में से सिर्फ तीन ही मत मिले हैं।
इस तरह भाजपा उम्मीदवार ममता चौधरी ने मथुरा जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सात मतों से फतह हासिल की। इस प्रकार पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष पर भाजपा का कब्जा हो गया। इस दौरान लखनऊ से आए भाजपा के प्र्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल टंडन भी मौजूद रहे।
हाथरस: विनोद बने जिला पंचायत अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के बेहद प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में लगातार पांचवीं बार बसपा ने कब्जा जमाया है। कड़े मुकाबले में बसपा समर्थित प्रत्याशी विनोद उपाध्याय ने सपा प्रत्याशी हसायन ब्लॉक प्रमुख ओमवती यादव को एक वोट से हराकर अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा कर लिया।
25 सदस्यीय जिला पंचायत के लिए विनोद को 13 और ओमवती को 12 वोट मिले। हालांकि बसपा खेमे से 14 सदस्य मतदान के लिए पहुंचे थे, लेकिन नतीजे की घोषणा में बसपा का एक सदस्य कम निकला।
विजयी प्रत्याशी विनोद पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के छोटे भाई हैं और जिले की सादाबाद और बुलंदशहर की डिबाई सीट से बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। इस पद के लिए सीधा मुकाबला विनोद और ओमवती यादव के बीच था।
हालांकि आम चुनाव में बसपा के समर्थन पर 13 सदस्य जीतकर आए थे। बाद में छह और सदस्य बसपा खेमे से जुड़ गए। इस तरह बसपा 19 सदस्यों के समर्थन का दावा कर रही थी, लेकिन बाद में उसके खेमे से पांच सदस्य सपा के खेमे में चले गए।
इस तरह सपा को पांच अपने सदस्यों के अलावा 10 सदस्यों का समर्थन मिल गया। रालोद के एकमात्र सदस्य का समर्थन मिलने से उसके पास 11 सदस्य हो गए।
दो दिन पूर्व सपा प्रत्याशी ओमवती यादव पर हुए हमले के चलते सुबह से ही कलेक्ट्रेट में सुरक्षा के तगड़े इंतजामों के बीच अध्यक्ष पद के लिए वोटिंग शुरू हुई।
डीएम अबरार अहमद और एडीएम डीपी सिंह की मौजूदगी में पहले बसपा समर्थित सदस्य मतदान के लिए पहुंचे और उसके बाद सपा समर्थित सदस्यों ने वोट डाले। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे तक सभी सदस्यों ने मतदान कर लिया और इसके बाद मतपेटिका को सील कर दिया गया।
आयोग के प्रेक्षक रमाशंकर और दोनों प्रत्याशियों की मौजूदगी में मतपेटी की सील खुलवाकर वोटों की गिनती कराई गई। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे डीएम ने बसपा के विनोद उपाध्याय को एक वोट से विजयी घोषित कर दिया। उन्हें प्रेक्षक की मौजूदगी में प्रमाण पत्र भी दिया गया। विनोद की जीत से बसपा समर्थक खुशी से उछल पड़े। उन्होंने कलेक्ट्रेट के बाहर जमकर जश्न मनाया और नारेबाजी की।
अलीगढ़: उपेंद्र सिंह नीटू जीते
इसे सपा का मिस मैनेजमेंट कहो या पूर्व मंत्री ठा. जयवीर सिंह का मैनेजमेंट। मगर रामसखी कठेरिया को 2006 में खुद के समर्थन से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाकर और 2011 में सुधीर चौधरी के बाद इस बार भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू को जिताकर, पूर्व मंत्री ठा. जयवीर सिंह ने जिले की सियासत में लगातार तीसरी बार अपने रसूख का आंकलन करा दिया है।
यह बात किसी से छिपी नहीं कि इस बार बसपा के मात्र 13 जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीतकर आए थे। हर दल निर्दलों के सहारे नैय्या पार लगाने की जुगत में था। लेकिन 13 से यह आंकड़ा 42 तक पहुंचाने और सत्ताधारी सपा को धूल चटाने में उन्होंने पूरी ताकत लगा दी।
यही वजह रही कि बसपा के आगे सत्ताधारी दल सपा क्लीन बोल्ड हो गया। इसके पीछे बड़ी वजह जिला पंचायत के मझे हुए खिलाड़ी तेजवीर सिंह गुड्डू की टिकट कटना भी माना जा रहा है।
जिस दिन पंचायत चुनाव की मतगणना के बाद जिले में 52 सीटों पर परिणाम घोषित हुए थे। उसी दिन से यह कयास लगाए जाने लगे थे कि आखिर अगला जिला पंचायत अध्यक्ष कौन होगा? बसपा के पास जहां 13 जिला पंचायत सदस्य थे।
वहीं अन्य पार्टियां भी अपने पास 9 से 10 सदस्य होने का दावा कर रही थीं। ऐसे में यही कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार कहीं सत्ताधारी सपा या संयुक्त विपक्ष हाथ न मार जाए। इसे लेकर संयुक्त विपक्ष की बैठक भी हुई थी और अध्यक्ष पद के लिए टाल ठोकते हुए प्रत्याशी पर भी चर्चा हुई, लेकिन संयुक्त विपक्ष की सारी योजना पूर्व मंत्री के मैनेजमेंट के आगे फेल हो गईं।
उन्होंने अपने सियासी रसूख के आगे सभी को बौना साबित करते हुए सत्ताधारी दल को 9 वोटों पर सीमित कर दिया। बता दें कि 9 में से एक वोट खुद सपा प्रत्याशी का होगा। इस तरह शेष 8 वोट ही उन्हें मिले हैं। इस चुनाव में उनके इस दमखम को देख अन्य दल भी भौचक हैं।
पिछली बार बसपा सत्ता में थी। जब सुधीर चौधरी कुल 42 में से 38 वोट पाकर चुनाव जीते थे। मगर इस बार बसपा विपक्ष में रही। मात्र चार वोट राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी चौ. कल्यान सिंह को मिले थे। बसपा ने इस बार फिर से हालात अपने पक्ष में रिपीट किए।
माया के जय-वीरू ने ‘हुकूमत’ को हराया
38 निर्विरोध समेत सूबे में कुल 59 सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी अलीगढ़ और हाथरस में बसपा की बादशाहत को नहीं तोड़ सकी। सपा की आंधी में भी बसपा सुप्रीमो मायावती के जय (पूर्व कबीना मंत्री एवं एमएलसी ठा.जयवीर सिंह) और वीरू (पूर्व कबीना मंत्री रामवीर उपाध्याय) की जोड़ी ने अपना दबदबा बनाए रखा।
जयवीर अपने भतीजे नीटू और रामवीर अपने भाई विनोद उपाध्याय को जीत दिलाने में कामयाब रहे। खास बात यह रही कि दोनों ही सीटों पर बसपा और सपा में सीधा मुकाबला था। जिसमें बसपा ने बाजी मार ली।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में जीत के लिए नेताओं ने साम-दाम-दंड-भेद का प्रयोग किया। चार सीटों के साथ सूबे में तीसरे नंबर पर रहने वाली बसपा के सामने अलीगढ़ और हाथरस में अपनी साख बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं था।
अलीगढ़ में बसपा के कद्दावर एमएलसी ठा. जयवीर सिंह की आंधी चलना पहले ही तय माना जा रहा था। चुनाव के दिन सुबह नौ बजे जब उनके भतीजे और जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदार उपेंद्र सिंह नीटू 38 सदस्यों के साथ कलेक्ट्रेट पर पहुंचे तो सब दंग रह गए।
यहां 11 बजे चुनाव होते ही पूरी स्थिति साफ हो गई। इसके बाद 4 वोट और बसपा को मिले। जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी सपा विधायक राकेश सिंह की पत्नी डॉ. नीतू सिंह महज 9 वोटों पर ही सिमट गईं।
इधर, हाथरस में चुनाव से एक दिन पहले प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी ओमवती यादव (बुआ) पर जानलेवा हमले के आरोप में फंसे रामवीर के भाई विनोद उपाध्याय की जीत को लेकर संशय बना हुआ था। चुनाव परिणाम आने तक स्थिति कशमकश वाली थी।
मात्र एक वोट से जीत हासिल कर जहां बसपा ने पांचवीं वार परचम फहराया वहीं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय भी अपनी बादशाहत कायम रखने में कामयाब रहे।
सूबे में मात्र चार सीटें हासिल करने वाली बसपा ने दो सीटें अलीगढ़ और हाथरस में जीती हैं। वहीं शामली में बसपा समर्थित संतोष देवी (12) ने सपा की शेफाली चौहान (7) को हराया है। वहीं मिर्जापुर में भी बसपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।
इलाहाबाद: रेखा बनीं जिला पंचायत अध्यक्ष
सपा प्रत्याशी रेखा सिंह लगातार दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित हुईं। उन्होंने 83 फीसदी मतों पर कब्जा करते हुए अपनी नजदीकी प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी केशरी देवी पटेल को 63 मतों से करारी शिकस्त दी। वहीं, अपना दल प्रत्याशी को महज दो मतों से संतोष करना पड़ा।
अपराह्न साढ़े तीन बजे परिणाम सामने आते ही सपाइयों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया और जमकर पटाखे फोड़े। जीत के बाद रेखा सिंह ने आने वाले समय में जिला पंचायत की ओर से लागू की जाने वाली योजनाएं साझा कीं तो बसपा प्रत्याशी ने चुनाव में पक्षपात का आरोप लगाते हुए सपा पर निशाना साधा।
मतदान बृहस्पतिवार दिन में 11 बजे शुरू हुआ। छावनी बने जिला पंचायत परिसर में तगड़ी सुरक्षा के बीच शांति के साथ दोपहर सवा दो बजे मतदान पूरा हुआ। इस बीच जिला पंचायत परिसर के भीतर और बाहर चहलकदमी कर रहे कुछ संदिग्धों से पुलिस ने पूछताछ की और कुछ को उठा लिया, जिन्हें मतदान पूरा होने के बाद छोड़ा गया।
चार निरक्षर वोटरों को मतदान के लिए सहायक/साथी उपलब्ध कराए गए। चुनाव में शत प्रतिशत वोट पड़े यानी सभी 90 जिला पंचायत सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान शुरू होने के आधा घंटे बाद 11.30 बजे तक 16 वोट पड़ गए थे। दोपहर डेढ़ बजे तक 65 और दो बजे तक 89 वोट पड़े गए जबकि अंतिम वोट सवा दो बजे पड़ा।
दोपहर तीन बजे मतगणना शुरू करा दी गई। साढ़े तीन बजे तक परिणाम सामने आ गए। सपा प्रत्याशी रेखा सिंह ने 75 वोट हासिल कर एकतरफा जीत दर्ज की। वहीं, बसपा से केशरी देवी पटेल को 12 और अपना दल प्रत्याशी बबिता सिंह को महज दो वोट मिले। एक मत अवैध घोषित किया गया।
डीएम संजय कुमार ने रेखा सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाए जाने का प्रमाणपत्र सौंपा। बता दें कि इलाहाबाद में जिला पंचायत सदस्यों की कुल 92 सीटें हैं। चुनाव के बाद एक जिला पंचायत सदस्य की मौत हो गई थी जबकि नवनिर्वाचित रेखा सिंह मांडा में दो सीटों से चुनाव लड़ी थीं और दोनों जगह से जीती थीं। ऐसे में दो सीटें रिक्त हो गईं और जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में 90 वोटर रह गए।
बरेली और पीलीभीत में सपा प्रत्याशी जीते
मंडल के दो जिलों बरेली और पीलीभीत जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में जहां सपा प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई वहीं शाहजहांपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने अप्रत्याशित तौर पर पर कब्जा जमा लिया।
बरेली में सपा के संजय सिंह बसपा के राजेश सागर को हराकर जिला पंचायत अध्यक्ष बने हैं। यह सीट सपा ने बसपा से छीनी है। संजय को 50 वोट मिले, जबकि राजेश सागर को 8 वोट मिले। मतगणना में एक वोट निरस्त कर दिया गया, जबकि एक सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया।
पीलीभीत में सपा प्रत्याशी एवं पूरनपुर विधायक पीतमराम की पुत्र वधू आरती देवी ने भाजपा (मेनका गुट) की आशा देवी को 24 वोट से हरा दिया। आरती देवी को 29 मत मिले, जबकि आशा देवी पांच वोट हासिल कर सकीं। वोटिंग के दौरान दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों में नोकझोंक भी हुई।
मेनका गुट ने जिला पंचायत सदस्यों को डरा-धमका कर उनका वोट जबरन डलवाने का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट गेट पर धरना-प्रदर्शन किया।
उधर, शाहजहांपुर में जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह यादव के बेटे अजय यादव ने अप्रत्याशित रूप से जीत लिया।
भाजपा समर्थित अजय यादव ने निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सपा प्रत्याशी नीतू सिंह को छह वोट से हरा दिया। अजय यादव को 26 वोट मिले, जबकि सपा प्रत्याशी 20 वोट हासिल हुए। दो मत अवैध घोषित कर निरस्त कर दिए गए।
गोरखपुर: सपा की गीतांजलि जीतीं
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर महीने भर से अधिक समय से चल रहीं अटकलों और दावों पर बृहस्पतिवार को विराम लग गया। सपा की गीतांजलि यादव ने भाजपा विधायक विजय बहादुर यादव के भाई एवं निर्दल प्रत्याशी अजय बहादुर यादव को सात मतों से हराकर जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया।
गीतांजलि को 34 और अजय बहादुर को 27 वोट मिले। 73 सदस्यों में से 11 वोट अवैध हो गए, जबकि एक वोट नहीं पड़ा। अध्यक्ष पद के लिए गीतांजलि और अजय के अलावा निर्दल प्रत्याशी के तौर पर यशवंत यादव भी मैदान में थे, मगर उन्हें एक भी वोट नहीं मिला। उन्होंने खुद को भी अपना वोट नहीं दिया।
मतदान के अंतिम एक घंटे में वोट देने पहुंचे वार्ड नंबर दो से जीते सदस्य जितेंद्र सिंह को जहां वोट डालने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया वहीं वार्ड नंबर 36 के पवन सिंह को वोट डालने से पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया। जितेंद्र हत्या तो पवन हत्या के प्रयास के आरोपी हैं। पवन के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हुआ था।
जैसे ही पुलिस उन्हें पकड़ कर कलेक्ट्रेट के भीतर ले जाने लगी, अचानक डिवाइडर से कूद कर सपाइयों ने उनकी पिटाई कर दी। पुलिस ने बीच-बचाव का प्रयास किया तो सपा कार्यकर्ता उनसे भी हाथापाई करने लगे, जिससे कुछ पुलिस वालों को मामूली चोंटे आईं। एएसपी का बिल्ला टूट गया। सपाइयों को सूचना थी कि पवन अपना वोट अजय बहादुर को देने आए थे।
उधर, पवन के वोट नहीं देने पर अजय के भाई और भाजपा विधायक विजय बहादुर कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका आरोप था कि सत्ता के प्रभाव में आकर पुलिस और प्रशासन ने पवन को वोट नहीं डालने दिया।
हालांकि पुलिस के समझाने के बाद वह धरने से उठ गए मगर जैसे ही भाई के हारने की खबर लगी वह फिर टाउनहाल स्थित गांधी प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। विधायक का आरोप है कि अवैध वोट और सहयोगी वोटर के नाम पर चुनाव में धांधली की गई है। वह इस मामले को कोर्ट तक ले जाएंगे। विधायक ने पवन पर जानलेवा हमला करने को लेकर सपा उम्मीदवार व समर्थकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।
मेरठ: सीमा प्रधान जीतीं
समाजवादी पार्टी ने मेरठ में भाजपा को तगड़ा झटका देते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। सपा प्रत्याशी सीमा प्रधान ने भाजपा के कुलविंदर सिंह को दो मतों से हराकर जीत हासिल की। सीमा को 18 और कुलविंदर को 16 वोट मिले। सांसें थमा देने वाले चुनाव में मतगणना तक दोनों ही पक्ष अपनी जीत का दम भरते रहे। लेकिन, क्रॉस वोटिंग पर टिके चुनाव में सपा ने भाजपा को शिकस्त दे दी।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सपा की सीमा प्रधान और भाजपा के कुलविंदर के बीच सीधा मुकाबला था। पूर्वाह्न 11 बजे मतदान शुरू हुआ। सबसे पहले भाजपा प्रत्याशी कुलविंदर ने मतदान किया। इसके बाद सपा प्रत्याशी सीमा प्रधान और उनके साथ आई सुमन भदौड़ा व डॉ. मनोज अधाना ने वोट किया।
फिर थोड़े-थोड़े अंतराल पर सदस्यों का आना जारी रहा। सपा के सदस्य पांच ग्रुप में वोट डालने में पहुंचे। सबसे पहले तीन, फिर दो, पांच, छह और सबसे अंत में दो सदस्य आए। सबसे अंत में नवाजिश मंजूर और शमशाद वोट डालने पहुंचे। इन दोनों ने ढाई बजे वोट किया। जबकि, भाजपा खेमे से प्रत्याशी कुलविंदर जहां अपना वोट डालने अकेले ही पहुंचे, तो दूसरी बार में नौ सदस्य साथ आये और उसके बाद छह सदस्य एक साथ पहुंचे।
मुरादाबाद में शलिता बनीं पंचायत अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर पूर्व मंत्री जगराम सिंह की पत्नी सपा प्रत्याशी शलिता सिंह विराजमान हो गईं हैं। ग्यारह बजे से तीन बजे तक हुई पोलिंग में उन्हें कुल 18 वोट मिले। जबकि दूसरे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी अरुण कुमार को सोलह वोट पड़े थे। वोटिंग में ग्यारह जिला पंचायत सदस्यों के हेल्पर ने वोट डाले थे।
बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट में डीएम न्यायालय में जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए वोटिंग कराई गई। ग्यारह बजे से पोलिंग शुरू हो गई थी। कुल 34 जिला पंचायत सदस्य हैं जिनमें से 11 सदस्यों के हेल्पर ने वोट डाला। इन सभी ने स्वास्थ्य कारणों के चलते हेल्पर की मांग की थी।
हालांकि चुनाव के दौरान कहीं कोई बड़ा बवाल तो नहीं हुआ लेकिन हल्के फुल्के हंगामे होते रहे। सपाई और बसपाइयों में भिड़ंत होती रही। तीन बजे तक पोलिंग चला जबकि साढ़े तीन बजे नतीजे घोषित कर दिए गए थी।
सपा प्रत्याशी शलिता सिंह को 18 जिला पंचायत सदस्यों ने वोट दिया है। जबकि बसपा के अरुण कुमार को 16 वोट पड़े। शाम को जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष को सर्टिफिकेट दिया।
रामपुर में सपा प्रत्याशी की जीत
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी समाजवादी पार्टी के खाते में गई है। यहां पर सपा प्रत्याशी लाखन सिंह ने 25 वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत हासिल की है।
उनके निकटतम प्रत्याशी लाल सिंह को सिर्फ एक वोट मिला। लाल सिंह खुद अपना वोट डालने भी नहीं पहुंचे। जिला निर्वाचन अधिकारी ने लाखन सिंह को जीत का प्रमाण-पत्र दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव संपन्न हुआ। दिनभर चली वोटिंग के बाद शाम को परिणामों की घोषणा की गई।
समाजवादी पार्टी से घोषित प्रत्याशी लाखन सिंह को 25 वोट मिले, जबकि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हाफिज अब्दुल सलाम के करीबी लाल सिंह को महज एक वोट मिला। लाखन सिंह को विजयी घोषित किया गया।
जीत के एलान के साथ नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष लाखन सिंह को जिला निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने जीत का प्रमाण-पत्र दिया। प्रेक्षक जयप्रकाश द्विवेदी की निगरानी में मतदान और मतगणना का काम हुआ।
जीत का सर्टिफिकेट मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं ने लाखन सिंह का फूल मालाओं से स्वागत किया।