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राजनाथ के स्पष्ट संकेत, वाराणसी-वडोदरा सीट में से किसे छोड़ेंगे मोदी?

Sun, 11 May 2014 07:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस बात के स्पष्ट संकेत दिए कि नरेंद्र मोदी वाराणसी सीट नहीं छोड़ेंगे।
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हालांकि जब उनसे सीधा सवाल किया गया कि वडोदरा या बनारस में से किसे चुनेंगे मोदी तो उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि दोनों जगह की जनता को निराश नहीं किया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पार्टी हेड भी बनारस का और सरकार का हेड भी बनारस का होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी दल हमें समर्थन देना चाहेगा तो हम उसका स्वागत करेंगे।
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'भारत को जगद्गुरु बनाना है'

कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में राजनाथ ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि हमारे पीएम कैंडिडेट वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं। यह भी संयोग है कि वाराणसी मेरी जन्मभूमि है। जन्मभूमि का कर्ज उतारना बड़ा कठिन होता है। इसीलिए यहां से ऐसे व्यक्ति को उतारा गया जिसकी प्रकृति में ही विकास है।

उन्होंने कहा कि हमारी इस जन्मभूमि को नरेंद्र भाई अपनी कर्मभूमि बनाने के लिए सहयोग करें ताकि देश की सांस्कृतिक राजधानी का विकास हो। पार्टी के लोगों से परामर्श के बाद यह फैसला हमने किया कि मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ें क्योंकि हम इस हकीकत को समझते हैं कि भारत को जगद्गुरु बनाना है तो इसे सुपर इकोनॉमिक पॉवर तो बनाना ही होगा, सुपर स्पिरिचुअल पॉवर भी बनाना जरूरी है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार महंगाई, भ्रष्टाचार, कुशासन, असुरक्षा, बेरोजगारी जैसी चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रही है। इस विफलता से उनके प्रति जनता के मन में बेहद गुस्सा है। जनता इस सरकार से मुक्ति चाहती है। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने जिस नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनाया, उन पर जनता ने पूरा भरोसा जताया है।

'कांग्रेस-सपा-बसपा खेल रहे कम्युनल कार्ड'

उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार की कोई उपलब्धि है ही नहीं इसलिए मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस, सपा और बसपा मिलकर ‘कम्युनल कार्ड’ खेलने की कोशिश कर रहे हैं। पंथ, मजहब के नाम पर मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है।

इसके विपरीत यह आरोप लगाया जाता है कि भाजपा विभाजनकारी राजनीति करती है। यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। हमें ऐसा करने की जरूरत ही नहीं। पांच माह पहले कुछ राज्यों में चुनाव हुए। वह चुनाव हमने विकास और सुशासन के मुद्दे पर लड़ा और शानदार जीत हासिल की। जनता से अपील की कि मजबूत सरकार के लिए भाजपा को स्पष्ट जनादेश दें।

उन्होंने कहा कि ऐसा ताज दें कि हमें किसी अन्य राजनीतिक दल का मोहताज न होना पड़े। यह भी कहा कि शायद स्वतंत्र भारत का यह पहला चुनाव है जब परिणाम आने से पहले ही जनता ने स्पष्ट परिणाम दे दिए हैं।
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'आयोग से अपेक्षा कि भयमुक्त चुनाव हो'

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से यह अपेक्षा करता हूं कि जिन क्षेत्रों में अंतिम चरण में चुनाव होना है, वहां ऐसी व्यवस्था की जाए कि लोग भयमुक्त होकर मतदान करें और चुनाव निष्पक्ष हो।

बेनियाबाग में सभा की अनुमति न मिलने के मसले पर कहा कि मोदी के साथ खतरे की आशंका थी लेकिन राहुल और अखिलेश के लिए खतरे की आशंका क्यों नहीं थी?

यदि राहुल को परमिशन मिली, प्रदेश के मुख्यमंत्री को अनुमति मिली तो भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को अपने क्षेत्र में सभा की अनुमति क्यों नहीं दी गई। उनके साथ खतरे की आशंका कम है तो फिर उनकी सुरक्षा व्यवस्था समानांतर क्यों है?
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