सोलहवीं लोकसभा के लिए पिछले दो महीने से चले आ रहे चुनाव प्रचार का शोर शनिवार शाम थम गया, लेकिन इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक दूसरे पर जिस तरह के तीखे और व्यक्तिगत हमले किए उसकी टीस लंबे समय तक सालती रहेगी।
नेताओं के व्यक्तिगत हमले और लांछनों के चलते इस बार चुनाव प्रचार का स्तर काफी गिर गया और राजनीतिक माहौल कड़वाहट से भर गया।
चुनाव बाद जो भी दल सत्ता में आएगा उसे इस कड़वाहट को दूर करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
यह आम चुनाव अभी तक के सबसे लंबा चुनाव
चुनाव प्रचार में शायद ही कोई ऐसा दिन गया हो जब किसी न किसी दल ने अपनी तरफ से या प्रतिक्रिया स्वरूप कोई ऐसी टिप्पणी न की हो, जो राजनीतिक माहौल का तापमान बढ़ा दे।
यह आम चुनाव अभी तक के सबसे लंबा चुनाव है। इसमें लगभग दो महीने में नौ चरणों में मतदान संपन्न होगा। मतदान का आखिरी चरण 12 मई को है।
परिणाम 16 मई को सामने आएंगे। इस चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों तथा निर्दलीय के रूप में 8230 उम्मीदवार मैदान में उतरे।
अमित शाह और आजम खान पर लगा प्रतिबंध
प्रचार के दौरान कई बार तो इतने कड़वे बयान सामने आए कि आयोग को कई बार चेतावनी देनी पड़ी।
सपा के आजम खान तथा भाजपा के अमित शाह के बयानों पर आयोग ने कडे़ कदम उठाते हुए उनके चुनाव प्रचार पर ही रोक लगा दी।
शाह ने तो आयोग से खेद व्यक्त किया और उसके बाद उन्हें प्रचार की इजाजत मिल गई, लेकिन आजम खान खेद व्यक्त करना तो दूर आयोग को ही निशाना बनाते रहे।
सेल्फी लेकर फंसे मोदी, दर्ज हुई एफआईआर
भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव जैसे नेता भी आयोग की तिरछी नजर का शिकार हुए।
मोदी के खिलाफ वडोदरा में मतदान के बाद अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह सार्वजनिक रूप से दिखाने पर आयोग के निर्देश पर दो प्राथमिकी दर्ज की गई।
राहुल गांधी और मुलायम सिंह यादव को उनके आपत्तिजनक बयानों के लिए नोटिस जारी किया गया।
मोदी को बेनियाबाग में नहीं मिली रैली की इजाजत
इसके अलावा आयोग की तरफ से केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी तथा भाजपा नेता गिरिराज सिंह को भी नोटिस अथवा चेतावनी जारी हुई।
अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में बेनियाबाग में रैली की इजाजत नहीं मिलने के बाद मोदी की चुनाव आयोग से ठन गई। भाजपा के कई और नेताओं ने आयोग के रवैये की आलोचना करते हुए भेदभाव का आरोप लगाया।
यह टकराव इतना बढ़ा कि आयोग को प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर यह कहना पड़ा कि वह किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल से डरने वाला नहीं है और वह निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्य का पालन करता रहेगा।
मोदी ने नामांकन पत्र में भरा अपनी पत्नी का नाम
इससे पहले भी एक बार आयोग के रवैये से नाराज होकर मोदी ने उसे सार्वजनिक तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दे डाली थी।
इस चुनाव के शुरू में ही राजनीतिक माहौल गरमाने लगा था, जब मोदी मां बेटे की सरकार और शहजादा जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपनी चुनावी रैलियों में करने लगे थे।
बाद में मोदी के अपने नामांकन पत्र में पहली बार अपनी पत्नी का नाम दिए जाने का मामला कांग्रेस द्वारा उठाये जाने पर हालात तेजी से बिगड़ने लगे।
भाजपा ने साधा रॉबर्ट वाड्रा पर निशाना
भाजपा इतनी नाराज हुई कि उसने राहुल गांधी के बहनोई राबर्ट वाड्रा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनके कथित जमीन घोटालों की जांच की मांग शुरू कर दी।
इसके जवाब में राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अदाणी को गुजरात में जमीन देने को मुद्दा बना कर गुजरात मॉडल को टॉफी मॉडल की संज्ञा दे दी। उन्होंने आरोप लगाया गुजरात में अदाणी को एक रुपये प्रति मीटर की दर से हजारों वर्गमीटर जमीन उपलब्ध कराई गई है।
मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश में जाति बाण चलाने के बाद उनकी खुद की जाति विवाद का विषय बन गई।