2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा ने जेपीसी को बताया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नीतिगत फैसलों की जानकारी थी।
साथ ही उन्होंने अटार्नी जनरल जीई वाहनवती पर लगातार उनके खिलाफ झूठ बोलने का आरोप भी लगाया। हालांकि राजा खुद जेपीसी के समक्ष पेश नहीं हुए बल्कि उन्होंने समिति द्वारा भेजी लिखित सवालों की सूची के जवाब दिए।
राजा ने कहा कि प्रधानमंत्री और तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी को लाइसेंस पॉलिसी के बारे में जानकारी दी गई थी। 17 पन्नों के अपने जवाब में राजा ने कहा कि 2 नवंबर, 2007 को उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर पत्राचार किया और साथ ही निजी तौर पर भी चर्चा की।
13 मार्च को भेजे गए अपने नोट में उन्होंने कहा, ‘इन चर्चाओं में यह सहमति बनी कि संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से बातचीत करेंगे क्योंकि वह स्पेक्ट्रम खाली करने पर बनाए गए मंत्रिमंडल समूह की अध्यक्षता कर रहे थे।’
राजा ने कहा कि उनके और मुखर्जी के बीच नवंबर, 2007 में अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के आवंटन, दोहरी प्रौद्योगिकी के मुद्दे और नए लाइसेंसों के विषय पर बातचीत हुई।
जनवरी, 2008 में हुए आवंटन तक की सिलसिलेवार जानकारी देते हुए राजा ने कहा कि तत्कालीन सालिसिटर जनरल भी इन चर्चाओं के दौरान मौजूद रहे थे क्योंकि इसी मुद्दे पर मुकदमा दूरसंचार विवाद निवारण एवं अपीली प्राधिकरण (टीडीएसएटी) में लंबित था।
राजा ने कहा, ‘जाहिर है कि संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा 26.12.2007 को माननीय प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र और कुछ नहीं बल्कि सालिसिटर जनरल के भेजे गये नोट और उसके बाद विदेश मंत्री एवं संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से उनकी बातचीत को संयुक्त रूप से भेजा जाना था।’