कांग्रेस के शीर्ष राजनीति क्षितिज पर अपने उदय के साथ ही राहुल गांधी ने आम आदमी के लिए लगभग बहरे हो चुके शासन तंत्र को पूरी तरह बदलने का वादा किया है।
राहुल ने कहा है कि सत्ता सियासत का मौजूदा तंत्र केवल कुछ लोगों को ही मौका देता है। इसमें काबिल आम इंसान के लिए कोई जगह नहीं है। इसीलिए देश के युवा गुस्से में सड़कों पर उतर रहे हैं। वे खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उनके भाग्य का फैसला बंद दरवाजे के भीतर मुट्ठीभर वे लोग करते हैं जिनका हकीकत से कोई सरोकार नहीं होता।
इस तस्वीर को बदलने के लिए राहुल ने शासन के सभी तंत्रों से लेकर राजनीति और न्यायपालिका और शैक्षणिक ढांचे तक को पूरी तरह बदलने की बात कही। साथ ही राहुल ने कांग्रेस के ढांचे में बदलाव का ऐलान करते हुए 2014 के चुनाव में कांग्रेस के पीएम पद की अपनी उम्मीदवारी पर संशय की गुंजाइश खत्म कर दी।
उपाध्यक्ष बनने के बाद अपने पहले संबोधन में राहुल ने 2014 के अपने सियासी सफर का रोडमैप साफ करते हुए कहा कि गुस्से में सड़कों पर उतर रहे युवाओं की आकांक्षाओं को तुरंत सुलझाने की जरूरत है। अब वह इंतजार करने को तैयार नहीं है। वे यह कबूल करने को तैयार नहीं कि चंद लोग बंद कमरे में उसके भाग्य का फैसला करें।
अब लोग शासन और राजनीति में अपनी भागीदारी चाहते हैं। जबकि हमारा मौजूदा तंत्र केंद्रीयकृत है, जहां टीचर की नियुक्ति भी मुख्यमंत्री करता है। वाइस चासंलर की नियुक्ति का अधिकार उस व्यक्ति को है, जिसका शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं। हमारा मौजूदा तंत्र वास्तव में प्रतिभा नहीं, बल्कि औसत दर्जे को ही बढ़ावा देता है।
राहुल ने कहा कि युवा और बेचैन भारत अब देश और अपने भविष्य के फैसले में अपनी सीधी भागीदारी मांग रहा है। अब वह चुपचाप रह कर सुनने को तैयार नहीं है। राहुल ने कहा कि इस समस्या का समाधान सिस्टम ठीक करने भर से नहीं, बल्कि पूरी तरह बदलने से निकलेगा।
राहुल ने कांग्रेस को भी पूरी तरह बदलने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे पूरे देश में 40-50 ऐसे नेता तैयार करना चाहते हैं जो देश का नेतृत्व कर सकें। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्यों में कम से कम दस ऐसा नेता भी होने चाहिए जो मुख्यमंत्री बनाया जा सकें। इसके लिए राहुल ने आम लोगों को पार्टी में मौका देने की बात कही।
हालांकि इस बदलाव में राहुल ने वरिष्ठ नेताओं को पूरी तरह किनारा नहीं करने का भी भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि उनके अनुभवों का पूरी तरह इस्तेमाल किया जाएगा। कांग्रेस के शीर्ष कमान को पूरी तरह अपने हाथ में लेने का संदेश देते हुए राहुल ने सबको जज की तरह एक ही नजर से देखने की बात कही।
राहुल ने अपने इस दमदार संबोधन से कांग्रेस के शीर्ष क्षितिज पर अपने नए अवतार को बखूबी अंजाम दिया। उनके संबोधन का एक हिस्सा इतना भावपूर्ण था कि कांग्रेस के तमाम दिग्गज मंच पर खड़े होकर तालियां बजाते नजर आए। इस भावपूर्ण माहौल और इस्तकबाल से अभिभूत राहुल ने भी पहलले अपनी मां का माथा चूमा और फिर उनके गले लग गए।
प्रियंका और रॉबर्ट भी पहुंचे
हर खास मौके पर अपने भाई राहुल के साथ कंधे से कंधे मिला कर खड़ी रहने वाली प्रियंका वाड्रा कब जयपुर पहुंच गईं किसी को पता नहीं चला। हालांकि प्रियंका सार्वजनिक समारोह में नजर नहीं आईं लेकिन सूत्रों के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष पद पर अपने भाई की ताजपोशी उन्होंने मंच के पीछे नजदीक ही बनी गैलरी से देखी।
प्रियंका के साथ उनके पति रॉबर्ट वाड्रा भी थे। दोनों विशेष रूप से राहुल के लिए जयपुर पहुंचे थे। प्रियंका और रॉबर्ट पूरे समय मंच के पीछे पर्दे में रहे। वहीं उन्होंने राहुल का पूरा भाषण सुना। प्रियंका-रॉबर्ट की कार्यक्रम में मौजूदगी इतनी गुप्त रखी गई थी कि वरिष्ठ कांग्रेसियों तक को उनकी भनक नहीं थी।
जयपुर घोषणा पत्र:
- इस साल विधानसभा चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यूपीए सरकार के प्रदर्शन, स्थिरता के वादे, बेहतर प्रशासन के साथ जनता के बीच जाएगी।
- समाज को तोड़ने और ध्रुवीकरण करने वालों के खिलाफ वैचारिक लड़ाई के लिए देश के सभी धर्मनिरपेक्ष एवं प्रगतिशील शक्तियों को एकजुट होना चाहिए।
- कांग्रेस चाहती है कि सरकार ‘आपका पैसा आपके हाथ’ स्कीम को समयबद्ध और प्रभावशाली तरीके से लागू करे, जिससे कि योजना का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच सके और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे।
- अगर पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता चुनाव में किसी उम्मीदवार की सिफारिश करता है तो उसे उस उम्मीदवार की विफलता की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। संगठन में भाई भतीजावाद पर रोक लगाने की जरूरत है।
- कांग्रेस राजनीति और नौकरशाही के भ्रष्टाचार को मिटाने की लड़ाई में सबसे आगे रहेगी।
- कांग्रेस स्वीकार करती है कि अल्पसंख्यकों के अधिकार अभी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं।
- कांग्रेस चुनाव और न्यायिक सुधार के लिए अपनी कोशिश जारी रखेगी। लोकसभा में लोकपाल बिल पारित कराने की कोशिश पूरी तरह जारी रहेगी।
- कांग्रेस मानती है कि सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे किसानों की आय बढ़े और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
- पड़ोसी देश (पाकिस्तान) के साथ बातचीत ‘स्वीकार योग्य सभ्य व्यवहारों के सिद्धांत’ पर आधारित होनी चाहिए। अगर ऐसे सिद्धांतों का उल्लंघन होता है तो भारत को उचित कदम उठाने में संकोच नहीं करना चाहिए।