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10 बोगियों में 700 यात्री थे, तो बाकी कहां गए?

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पानी के तेज बहाव में कितने यात्री बह गए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कामायनी डाउन ट्रैक पर मुंबई से वाराणसी जा रही थी और अप ट्रैक पर जनता एक्सप्रेस पटना से मुंबई के रास्ते पर थी। दोनों लंबी दूरी की ट्रेनें हैं।
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कल्पना कर सकते हैं कि हर कोच में यात्रियों की संख्या क्या रही होगी। जनरल बोगी में तो भीड़ आम तौर पर ज्यादा रहती है। अगर एक कोच में मोटे तौर पर 70 यात्रियों का आंकड़ा माना जाए, तो इस लिहाज से दुर्घटना का शिकार बने 10 कोचों में  700 यात्री रहे होंगे।

रेल प्रशासन और राज्य सरकार कह रही है कि 28 शव बरामद किए जा चुके हैं और 300 यात्रियों को बचा लिया गया है। ऐसे में यह सवाल चिंता का विषय बन रहा है कि बाकी के यात्री कहां गए। रेलवे प्रशासन ने इन बोगियों में सवार कुल यात्रियों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
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घटनास्थल से पांच किलोमीटर दूर खेतों में मिले शव

दरअसल कुछ यात्रियों के शव घटनास्थल से पांच किलोमीटर दूर खेतों में मिले हैं। स्पष्ट है कि हादसे के वक्त पानी का बहाव इतना तेज था कि कई यात्री बह गए। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार सुबह हरदा रवाना होने से पहले इसकी जानकारी दी थी।

चार फुट ऊपर बह रहा था पानी: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बीती रात जब ट्रेनें पुलिया से गुजर रही थीं तब पटरी के चार फुट ऊपर पानी बह रहा था। जाहिर है इलाके में बाढ़ के हालात के बावजूद पुलिया वाले रेलवे ट्रैक को लेकर कोई एहतियात नहीं बरती गई, और न ही ट्रेन को पुलिया के पहले रोका गया।

बोगी में घुस आया था पानी: मुंबई से इलाहाबाद जा रही कामायनी एक्सप्रेस के एस-4 में सवार यात्री चंदन सिंह ने बताया कि अचानक जोर की आवाज हुई। कई यात्रियों की नींद खुल गई और लोग आवाज के बारे में एक-दूसरे से पूछ रहे थे कि अचानक कोच में पानी घुस आया। लगभग 20-25 मिनट बाद टिकट चेकर ने एक-एक कर लगभग 40 यात्रियों को कोच के रास्ते जनरल कोच में पहुंचाया।
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रेलवे के रिकार्ड में खतरनाक चिह्नित नहीं थी पुलिया

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल के मुताबिक प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि जिस घटनास्थल पर दुर्घटना घटी है वह पहले से रेलवे की नजरों में खतरनाक जगह के रूप में चिह्नित नहीं था। उन्हें सूचना मिली है कि घटनास्थल के आसपास पिछले दो दिनों से काफी बरसात हो रही थी, जिसके चलते वहां पानी भर गया था। जब यह पानी काफी हो गया तो उसने तेज बहाव की शक्ल ले ली।

इटारसी की ओर से आ रहे कामायनी एक्सप्रेस के ड्राइवर ने देखा कि पुलिया के ऊपर से ट्रैक पर पानी गुजर रहा है। उसने 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही ट्रेन पर ब्रेक लगाए, लेकिन जिस स्थान पर दुर्घटना हुई है वहां पर जब यह ट्रेन पहुंची तब उसकी गति 50 किलोमीटर थी। ट्रेन के पिछले 11 डिब्बे पटरी से उतरे हैं। इसके बाद खंडवा की ओर से जनता एक्सप्रेस आई। उसने पानी और कामायनी एक्सप्रेस को देखा।

ड्राइवर ने काफी पहले ब्रेक लगा दिया फिर भी उसके पहले चार डिब्बे पटरी से उतर गए। उन्होंने खुलासा किया कि दुर्घटना से आठ मिनट पहले ही पवन एक्सप्रेस और एक पैसेंजर ट्रेन वहां से गुजरी थी। जिस पुलिया से पानी गुजरा वह अभी भी अपनी जगह पर खड़ी है। यह पुलिया इतनी चौड़ी नहीं थी जिससे पानी उसके नीचे से बह पाता। यही कारण था कि पानी ट्रैक के ऊपर से गुजरा और उसके नीचे की मिट्टी को बहा ले गया।

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी खुलासा किया कि अगर कामायनी एक्सप्रेस के डिब्बे बायीं तरफ न गिरकर दाईं ओर गिरे होते तो जनता एक्सप्रेस के साथ सीधी टक्कर भी हो सकती थी। इससे हताहतों की संख्या काफी हो सकती थी।
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