चुनावों में वीआईपी सीट को लेकर चल रहे कांग्रेस और भाजपा के बीच घमासान में एक अनजाना सा नाम अचानक सुर्खियां बन गया है। कांग्रेसी गढ़ रायबरेली में इस अनजाने से चेहरे को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है।
रायबरेली से भाजपा ने अजय अग्रवाल को कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा है। हाल तक नाम उमा भारती का उछाला जा रहा था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
टिकट की घोषणा होती है हर किसी के दिमाग में अजय अग्रवाल के नाम को लेकर काफी असमंजस है। विरोधियों के साथ समर्थक भी राजनीति से इतर एक व्यक्ति को सोनिया गांधी के खिलाफ टिकट देने पर सवाल उठा रहे हैं।
आगे पढ़िए कि आखिर राजनीति के इतने बड़े कद के सामने भाजपा ने अजय अग्रवाल को क्यों चुना और वो हैं कौन?
सोनिया के खिलाफ अजय ने खोला था मोर्चा
चुनावी रण में सोनिया गांधी को चुनौती देने वाले अजय अग्रवाल पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही अजय अग्रवाल देश की सबसे शक्तिशाली महिला को चुनौती दे चुके हैं।
दरअसल स्वीडन के साथ 1.3 बिलियन डॉलर में हुई बोफोर्स तोप डील में घोटाले की बात सामने आई तो तहलका मच गया।
इस डील में हुए भ्रष्टाचार की सीधी आंच तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी तक पहुंची थी। इस घोटाले को लेकर अजय अग्रवाल ने ही सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर की थी और इस घोटाले के सीधे तार सोनिया से जुड़े होने का दावा किया था।
बोफोर्स के अलावा भाजपा के प्रत्याशी अजय अग्रवाल ने भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में पीआईएल दाखिल की हैं। इनमें बोफोर्स के अलावा, यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से जुड़ा ताज कॉरीडोर, तेलगी स्टांप घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाले जैसे बड़े मामले शामिल हैं।
शुरूआत से भाजपा से जुड़े रहे हैं अजय
ऐसा बताया जाता है कि अपनी पढ़ाई-लिखाई के दौरान से ही अजय अग्रवाल भाजपा की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं और वो भी सक्रिय रूप से।
भाजपा से टिकट मिलते ही अजय अग्रवाल ने दावा किया कि जीत उनकी ही होगी। अजय अग्रवाल ने कहा कि वह सोनिया गांधी से काफी पहले से भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। उनका इशारा बोफोर्स घोटाले को लेकर था।
अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए अजय अग्रवाल ने कहा था कि वह गुजरात के विकास से प्रभावित हैं और देश और गुजरात अब उनके नेतृत्व में तरक्की करे।
खुद की थी टिकट की मांग
टिकट को लेकर भाजपा में ही सबसे ज्यादा बगावत के सुर तेज हैं। टिकट दिए जाने से 10-12 दिन पहले ही अजय अग्रवाल ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी के लखनऊ दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन किया था।
पार्टी के फैसले का विरोध करते हुए अजय अग्रवाल ने आरोप लगाए थे कि सोनिया गांधी के खिलाफ भाजपा कमजोर प्रत्याशी उतारना चाहती है। और शायद यही दबाव काम कर गया।
खबर के मुताबिक अजय अग्रवाल ने खुद ही पार्टी आला कमान से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। उनका कहना था कि वह इस सीट के लिए बीते 6 महीने से तैयारी कर रहे थे। 50 गाड़ियों के काफिले के साथ अग्रवाल समर्थकों को लेकर पार्टी के लखनऊ दफ्तर पर पहुंचे थे।
स्मृति ईरानी देंगी राहुल को चुनौती
एक तरफ जहां पार्टी ने सोनिया गांधी के खिलाफ कानूनी जंग लड़ने वाले अजय अग्रवाल को रायबरेली से टिकट दिया है। वहीं दूसरी तरफ टीवी सीरियल की सबसे लोकप्रिय बहु रहीं स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के खिलाफ उतारा है।
वीआईपी सीट अमेठी में स्मृति ईरानी के उतरने के बाद मामला और दिलचस्प हो गया है। इससे पहले आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास पहले से ही ताल ठोक चुके हैं और महीनों से प्रचार कर रहे हैं।
जब स्टार प्रत्याशी लड़ेंगे तो जुबानी जंग भी तेज होगी। स्मृति ईरानी के ऐलान के बाद आप के कुमार विश्वास ने कहा कि ईरानी, पाकिस्तानी जो भी आएं जीत आम आदमी पार्टी की ही होगी।