महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में अगर भाजपा की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री पद की रेस में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर कूद सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार अंतिम मौके पर भाजपा नेतृत्व उनके नाम पर मुहर लगा सकता है। महाराष्ट्र चुनावों में पार्टी ने उन्हें पहले ही विशेष जिम्मेदारियां दे रखी हैं, जिनके चलते जावड़ेकर पिछले पंद्रह दिनों से राज्य में भाजपा की रणनीति बना रहे हैं।
जावड़ेकर की दावेदारी को पिछले रविवार उस वक्त और मजबूती मिली जब नागपुर में उन्होंने मीडिया में संकेत दिए कि अक्तूबर के तीसरे हफ्ते में केंद्रीय मंत्रिमंडल में ‘महत्वपूर्ण परिवर्तन’ देखने को मिल सकते हैं। उल्लेखनीय है कि 15 अक्तूबर को राज्य में वोटिंग होनी है और 19 अक्तूबर को परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
भाजपा ने अभी नहीं घोषित किया है उम्मीदवार
भाजपा ने अभी सीएम पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, ऐसे में जावड़ेकर केंद्र से राज्य में आ सकते हैं। वैसे राज्य भाजपा में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं।
पिछली विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से, राज्य भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार और विधान परिषद में प्रतिपक्ष नेता विनोद तावड़े इनमें खास हैं।
लेकिन गडकरी राज्य की राजनीति में नहीं लौटना चाहते, जबकि बाकी नाम ऐसे नहीं हैं कि जिनके नाम पर पार्टी में ही सर्वसम्मति बन पाए। ऐसे में जावड़ेकर पर्दे के पीछे से निकल कर सामने आ सकते हैं।
नरेंद्र मोदी के विश्वसनीय है प्रकाश जावड़ेकर
प्रकाश जावड़ेकर की छवि भले ही ‘मास लीडर’ की नहीं है, लेकिन पार्टी में उनका बराबर सम्मान है और वे विवादों से दूर हैं। सबसे खास बात यह कि वे इन दिनों भाजपा में सर्वेसर्वा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे विश्वसनीय लोगों में से हैं।
सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में सरकार आने पर मोदी चाहेंगे कि उन्हें समझने और उनकी योजनाओं को लागू करने वाला व्यक्ति ही मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाले।
केंद्रीय नेतृत्व उन्हें महाराष्ट्र में इसलिए भी आगे बढ़ाना चाहता है क्योंकि गोपीनाथ मुंडे के बाद वहां ऐसा कोई नेता नहीं बचा, जो शिवसेना और मनसे जैसी हिंदू विचारधारा वाली पार्टियों के साथ तालमेल बैठा सके। जावड़ेकर के दोनों पार्टियों से निजी संबंध भी हैं।