भारत सरकार ने एक बार फिर पाकिस्तान के जिन्ना अस्पताल में भर्ती भारतीय कैदी सरबजीत सिंह को मानवीय आधार पर भारत भेजने की अपील की है।
जेल में हमला होने के बाद सरबजीत पिछले तीन दिनों से लाहौर के जिन्ना अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं। भारत पहले ही सरबजीत के इलाज में मदद की पेशकश कर चुका है।
विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि सरबजीत को मानवीय आधार पर रिहा करना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि सरबजीत को बेहतर इलाज के लिए भारत भेजा जाना चाहिए।
इसके पहले इस तरह की खबरें आईं कि पाकिस्तान बेहतर इलाज के लिए सरबजीत को विदेश भेजने पर विचार कर रहा है लेकिन पाकिस्तान सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों के पैनल ने सरबजीत सिंह को इलाज के लिए विदेश भेजने से मना कर दिया था।
गौरतलब है कि सरबजीत सिंह की सेहत पर पाकिस्तान सरकार ने चुप्पी साध रखी है।
रविवार को उसने भारतीय दूतावास के अधिकारियों को सरबजीत से दूर रखा। पाकिस्तान पहुंचे सरबजीत के परिवार को भी आईसीयू के बाहर से ही खिड़की से उसे देखने दिया गया।
पाकिस्तान ने सरबजीत की सेहत को लेकर अब तक कोई मेडिकल बुलेटिन भी नहीं जारी किया है। सरबजीत की हालत पर नजर रखे डॉक्टरों ने कहा है कि उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं है।
सरकारी डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने रविवार कहा था कि सरबजीत की सर्जरी नहीं की जा सकती। वह ‘डीप कोमा’ में है और सूत्रों के अनुसार डॉक्टरों के मुताबिक उसके बचने के मौके ‘बेहद कम’ हैं।
सरबजीत पर शुक्रवार को लाहौर की कोट लखपत जेल में करीब छह कैदियों ने जानलेवा हमला किया था। उसके सिर, चेहरे, गर्दन और पेट पर गंभीर चोटें आई हैं। उसके सिर में फ्रेक्चर हो गया है। उसे सरकारी जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बहन ने की है विदेश में इलाज की मांग
सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने मांग की है कि उनके भाई का इलाज पाकिस्तान से बाहर किया जाए।
रविवार को उन्होंने कहा था, 'सरबजीत की हालत बहुत गंभीर बनी हुई है। अगर मलाला युसूफजई को इतनी गंभीर हालत में यहां से बाहर ले जाकर उसका इलाज हो सकता है तो सरबजीत सिंह क्यों नहीं जा सकता।'
गौरतलब है कि तालिबान के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई मलाला यूसुफजई को ब्रिटेन ले जाया गया था जहां अब भी उनका इलाज चल रहा है।
दलबीर भारत से लाहौर गई हैं। दलबीर के साथ सरबजीत की पत्नी और दो बेटियां भी पाकिस्तान गईं हैं।