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लोकपाल को निकालने की तैयारी में केजरीवाल

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योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को राजनीतिक मामलों की समिति से बाहर निकालने के बाद आम आदमी पार्टी अपने आंतरिक लोकपाल एडमिरल एल रामदास के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है। पार्टी के भीतर अरविंद केजरीवाल का खेमा एडमिरल रामदास से काफी नाराज है।
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उस खेमे का मानना है कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के कारण पार्टी के भीतर जो घमासान हो रहा है कि उसमें एडमिरल रामदास के उस पत्र ने आग में घी का काम किया था, जिसमें उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाया था और कहा था कि मुख्यमंत्री और पार्टी का संयोजक एक व्यक्ति नहीं हो सकता।

पिछले महीने एडमिरल रामदास ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में उन्होंने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी व केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
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उन्होंने कहा था कि पार्टी में लोकतंत्र नहीं है। इसमें और दूसरी पार्टियों में फर्क नहीं है। पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। शीर्ष नेतृत्व दो गुटों में बंट गया है। सरकार में एक भी महिला को जगह नहीं मिली है।

एडमिरल के पत्र में केजरीवाल पर गंभीर आरोप

एडमिरल रामदास ने 26 फरवरी को होने वाली राष्ट्रीय कार्यका‌रिणी के बैठक से ठीक पहले पत्र लिखा था। आप की वह बैठक बहुत ही हंगामेदार रही थी और उसके दो दिन बाद ही पत्र लीक हो गया।

उस बैठक में प्रशांत भूषण ने अर‌विंद केजरीवाल को संयोजक पद से हटाने का प्रस्ताव रखा था। भूषण की दलील मुख्यमंत्री पद और पार्टी संयोजक की दोहरी जिम्मेदारियों पर थी। हालांकि एकमत से उसे खारिज कर दिया गया।

उस बैठक के बाद ये लगभग तय हो गया था कि योगेंद्र और प्रशांत को आप की पीएसी से बाहर कर दिया जाएगा। चार मार्च को उन्हें पीएसी से उन्हें बाहर भी कर दिया। उस वाकये बाद से ही आम आदमी पार्टी में हंगामा मचा हुआ है। योगेंद्र और प्रशांत की एक पत्र भी सामने आ चुका है, जिसमें उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए थे।
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'योगेंद्र, प्रशांत के पक्ष में झुके हैं एडमिरल रामदास'

आप के वरिष्ठ नेता कहा कि रामदास ने अपने पत्र में एक आदमी, एक पद का मुद्दा उठाया था, लेकिन वह एक परिवार एक पद के मुद्दे पर कुछ नहीं बोले। यदि वह निष्‍पक्ष होते तो भूषण परिवार का मुद्दा उठाते, जिसके दो सदस्य प्रशांत भूषण और उनकी बहन शालिनी गुप्ता पार्टी में अहम पदों पर हैं।

उल्‍लेखनीय है कि प्रशंत भूषण आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्‍य और अनुशासन समिति के प्रमुख है। चार मार्चा को उन्हें पीएसी से बाहर किया गया, अन्यथा पीएसी के सदस्य भी थे। प्रशांत की बहन शालिनी गुप्ता आप की मिशन विस्तार की संगठनिक सलाहकार हैं।

पिछले दिनों आप नेता आशीष खेतान ने भी ये मुद्दा ट्विटर पर उठाया था। आप नेता नेता ने कहा कि रामदास फिलहाल एक निष्पक्ष व्यक्ति के बजाय योगेंद्र और प्रशांत के पक्ष में झुके हुए दिखाई दे रहे हैं।
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