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यूपी: हैवानियत पर जल उठे सिकंदराराऊ के ये हैं जिम्मेदार

Wed, 16 Jul 2014 06:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हाथरस
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सिकंदराराऊ में वही हुआ, जिसका डर था। गैंगरेप की पीड़िता के आत्मदाह के बाद ही प्रशासन को यह डर सता रहा था कि इस घटना के बाद सिकंदराराऊ की शांत फिजां बिगड़ नहीं जाए और हुआ वही। वैसे इस घटना से जहां यह बात भी सामने आ गई कि पुलिस का खुफिया नेटवर्क फेल हो गया। वहीं यह भी स्पष्ट हो गया कि कुछ अधिकारियों ने संवेदनशील मौके पर तल्ख तेवरों का परिचय देकर पूरे मामले को बिगाड़ दिया।
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वह पीड़ित परिवार और अन्य लोगों को समझा-बुझाकर शांत नहीं कर सके और उन्होंने अटैक का फॉर्मूला अपनाने की कोशिश की। बस, यह पुलिस प्रशासन के लिए ही उलटा पड़ गया। वहां पथराव और आगजनी से लेकर फायरिंग तक हुई और यदि कुछ पुलिसकर्मी हथियार नहीं उठाते तो हो सकता था कि थाना कोतवाली भी आग के हवाले होती।

गैंगरेप की पीड़िता की मौत के बाद ही सिकंदराराऊ में तनाव व्याप्त हो गया था। मामला दो अलग-अलग समुदायों से जुड़ा था, इसलिए यह आशंका जताई जा रही थी कि कहीं मामला दूसरा रूप न ले ले। अधिकारी सतर्क थे और खुद डीएम, एसपी ने मौके पर जाकर स्थिति देखी थी।
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अधिकारियों की नासमझी से हुआ बवाल

पीड़िता मरने से पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान नहीं दे पाई थी, लेकिन उसकी मां जरूर चीख-चीखकर यह कह रही थी कि उसकी बेटी के साथ गैंगरेप हुआ है और इसके चलते बेटी ने खुद को आग के हवाले किया है। मध्य रात्रि में पोस्टमार्टम के बाद मृतका का शव सिकंदराराऊ लाया गया। तभी वहां माहौल बदलने लगा। पुलिस का खुफिया तंत्र यहां फेल हो गया। इस मामले में जाम लगाकर प्रदर्शन करने की तैयारी रात्रि में ही कर ली गई थी।

कुछ लोग ऐसे भी शामिल हो गए थे, जोकि मामले को दूसरा रूप देना चाहते थे। आरोपियों को फांसी दो जैसी तख्तियां लेकर महिलाएं सड़क पर आ गई थीं और शेष दोषियों को गिरफ्तार करने के साथ-साथ यह मांग भी की जा रही थी कि एक धर्मशाला में अराजक तत्वों का अड्डा है। इस तरफ भी पुलिस ध्यान दे। शव बीच सड़क पर थाना कोतवाली के सामने रखा था। ऐसे में वहां एडीएम सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

हालांकि मौके पर पर्याप्त फोर्स नहीं था। ऐसे संवेदनशील हालात में अधिकारी सही तरीके से भीड़ को यह नहीं समझा पाए कि पुलिस ने दो रेपिस्टों को गिरफ्तार कर लिया है। यही नहीं जाम को खुलवाने की जल्दी अधिकारियों को थी। पर्याप्त फोर्स के आने तक भी इंतजार नहीं किया गया। इतने संवेदनशील मसले को शांतिपूर्वक ढंग से समझाने में जल्दी बरती गई और बस ऐसे में अधिकारियों ने जब लाश हटवाने की जबरिया कोशिश की तो माहौल बिगड़ गया।

जब अधिकारियों के चेहरे से उड़ गया रंग!

जब हालात बेकाबू हो गए तो अधिकारियों के चेहरे का रंग उड़ गया। भीड़ थाने में घुसी तो वहां भी चंद पुलिसकर्मी ही थे। बस फिर क्या था, वहां दर्जनों वाहन फूंके गए। दर्जनों ढकेल और खोखों को निशाना बनाते हुए आग के हवाले कर दिया गया। एक अधिकारी की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई और कुछ अधिकारी और पुलिसकर्मी चोटिल भी हुए।

यदि पुलिसकर्मी फायरिंग नहीं करते तो भीड़ थाने तक में आग लगा सकती थी। वैसे, यहां यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि बाद में डीएम और एसपी सहित कई थानों की फोर्स के पहुंचने पर मामला घंटों बाद संभला। प्रशासन की नजर इसके बाद इस पर भी रही कि जिन लोगों के खोखे और ढकेल फूंकी गई है, उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया तो नहीं हो रही।

सिकंदराराऊ में वैसे तो अब तनाव भरी शांति है, क्योंकि वहां चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात है, लेकिन कस्बे में कब फिर शांति व्यवस्था को पलीता लग जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि 11 जुलाई को कस्बे की एक विवाहिता को कुछ युवक उसकी ससुराल जसवंत नगर इटावा से अगवा कर लाए थे। आरोप है कि इन युवकों ने उसके साथ गैंगरेप किया। बाद में सोमवार की सुबह विवाहिता ने आत्मदाह कर लिया था। मंगलवार की सुबह जब उसका शव पोस्टमार्टम के बाद उसके घर लाया गया तो वहां कोहराम मच गया। मामला चूंकि दो समुदायों से जुड़ा हुआ था, इसलिए कुछ लोगों का आरोप था कि पुलिस घटना को लेकर शिथिलता बरत रही है।

घटना से गुस्साए मृतका के परिजनों और अन्य लोगों ने उसके शव को जीटी रोड पर थाना कोतवाली के सामने रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों में काफी महिलाएं भी शामिल थीं और वह गैंगरेप के आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग कर रही थीं।। इस बीच वहां एडीएम उदयीराम और अन्य अधिकारी भी आ गए। इन अधिकारियों ने जब जाम खुलवाने की कोशिश की तो कुछ लोगों की इनसे कहासुनी हो गई।

इन लोगों ने लाश सड़क से हटाने की कोशिश की तो भीड़ उग्र हो गई और बवाल शुरू हो गया।

एसडीएम ने खुद फायरिंग के लिए मांगी रायफल

भीड़ ने पुलिस पर जबर्दस्त पथराव करना प्रारंभ कर दिया। आक्रोशित भीड़ थाने के अंदर घुस गई और वहां जमकर तोड़फोड़ की। पुलिस वाले जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर भागे। लोगों ने थाने के बाहर खड़े दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया। थाने अंदर खड़ी शिवकुमार लेखपाल की बाइक फूंक दी। एडीएम की गाड़ी सहित दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ की। हिंसक भीड़ के हमले से तमतमाए एसडीएम सतीश पाल ने सीधे फायरिंग का निर्देश दिया लेकिन पुलिस कर्मियों ने उनके आदेश को अनसुना कर दिया। तमतमाए एसडीएम ने खुद फायरिंग के लिए राइफल मांगी।

हालात बेकाबू देख बाद में पुलिस ने फायरिंग की, जिससे स्कूल से पढ़ कर घर लौट रहे छात्र आशीष पुत्र नेम सिंह निवासी नौरंगाबाद पूर्वी पांव में गोली लगने से जख्मी हो गया। उसे पहले इलाज के लिए सीएचसी लाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे आगरा रेफर कर दिया गया। एक घंटे तक पूरे कस्बे में अराजकता का माहौल रहा। चारों तरफ पथराव आगजनी फायरिंग हुई। आसपास के थानों का पुलिस फोर्स आ गया तो पुलिस ने भीड़ को खदेड़ कर सड़क पर रखे शव को अपने कब्जे में ले लिया।

एसपी दीपिका तिवारी, डीएम शमीम अहमद के अलावा काफी फोर्स आ गया दमकलों ने आग पर काबू पाया। सड़क से भीड़ छंटने के बाद फिर पुलिस ने मृतका के मोहल्ले में जाकर कुछ युवकों की तलाश में घरों में घुस कर तोड़ फोड़ की और कई को हिरासत में ले लिया। दहशत में कई घरों के परिवार पलायन कर  गए हैं। मामले पर मंडलायुक्त टी. वेंकटेश एवं डीएम शमीम अहमद ने कहा कि स्थिति संभालने के लिए हवाई फायरिंग की गई और लाठीचार्ज भी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अराजकता फैलाने वाले चिन्हित कर लिए गए हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालात तनाव पूर्ण हैं, लेकिन नियंत्रण पा लिया जाएगा।
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सिकंदराराऊ बवाल की आग हाथरस तक पहुंची

सिकंदराराऊ में नवविवाहिता के साथ गैंगरेप की घटना को लेकर हुए बवाल के चलते यहां पूर्वोत्तर रेलवे के सिटी स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन को डेढ़ घंटे तक खड़ा होना पड़ा। अधिकारियों द्वारा बवाल शांत होने की जानकारी दिए जाने के बाद ही इस ट्रेन को सिकंदराराऊ के लिए रवाना किया गया। स्टेशन पर ट्रेन के काफी देर तक खड़े होने के कारण दूर दराज जाने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। वहीं, सिकंदराराऊ के यात्रियों ने ट्रेन को छोड़ दिया।

काफी यात्री ट्रेन छोड़ कर अन्य वाहनों से गंतव्य के लिए रवाना हुए। मंगलवार की दोपहर मथुरा से कासगंज जाने वाली पैसेंजर ट्रेन बवाल के चलते सिटी स्टेशन पर डेढ़ घंटे तक खड़ी रही। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ यात्री ऐसे भी थे जिन्हें कासगंज से दूसरी ट्रेनें पकड़नी थी। ऐसे में उनकी की ट्रेनें भी छूट गई। इससे यात्रियों पर अतिरिक्त खर्चा भी करना पड़ा। यहां से सिकंदराराऊ जाने वाले यात्रियों ने तो ट्रेन ही छोड़ दीं। सिकंदराराऊ के यात्री अन्य वाहनों से रवाना हुए।

पूर्वोत्तर रेलवे के मथुरा-कासगंज ट्रेक पर सिकंदराराऊ बवाल के चलते सुबह साढ़े दस बजे चलने वाली मथुरा-कासगंज ट्रेन को रति के नगला स्टेशन पर रोकना पड़ा। सिकंदराराऊ में काफी देर तक पथराव और आगजनी की जानकारी मिलने पर रेलवे ने इस ट्रेन को कासगंज जाने के स्थान पर पुन: मथुरा के लिए रवाना करा दिया। इससे कासगंज जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। सिकंदराराऊ बवाल के चलते सभी पैसेंजर ट्रेनें कई घंटे देरी से स्टेशन पर पहुंची।
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