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स्वच्छता के बाद पीएम मोदी की प्राथमिकता सबको मिले मकान

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स्वच्छ भारत मिशन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता अब सबको मकान देने की है। प्रधानमंत्री ने 2022 तक सबको पक्का मकान देने का एलान कर रखा है।
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स्वच्छता अभियान को पटरी पर लाने के बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय इन दिनों पीएम मोदी के सबको मकान उपलब्ध कराने के सपने को पूरा करने में जुटा है। इस कवायद में मंत्रालय जल्द ही इंदिरा आवास योजना को मिशन मोड में लाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए योजना में बदलाव के साथ उसकी राशि में बढ़ोत्तरी की जाएगी।

संसदीय समिति ने भी योजना के तहत मिलने वाली वर्तमान राशि को कम बताते हुए इसे बढ़ाने पर जोर दिया है। देश में 20 प्रतिशत मकान अब भी कच्चे हैं जो घासफूस, बांस और लकड़ी से बने हैं।
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सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद गांवों में लोगों को मकान नसीब होने का प्रतिशत महज 23 है। जबकि शहरों में यह 53 प्रतिशत है। सूत्र बताते हैं कि इंदिरा आवास योजना के पुनरोद्धार के लिए मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की बीते बुधवार को आयोजित बैठक किन्हीं कारणों से नहीं हो सकी। मगर यह बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी।

बताया जा रहा है कि पीएमओ ने इंदिरा आवास योजना के क्रियान्वयन में गहरी रुचि दिखाई है। पीएमओ ने योजना से जुडे़ ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों को संकेत दिए हैं कि इंदिरा आवास योजना के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। उसने मंत्रालय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे योजना के तहत अच्छे मकान के लिए नीति तैयार करें।
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योजनाओं के लिए धन की किल्लत

अब तक इस योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) रहने वाले मैदानी इलाके के लोगों को मकान बनाने के लिए अनुदान के रूप में 70 हजार रुपये देने का प्रावधान है। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए यह राशि 75 हजार रुपये है। मगर भवन निर्माण सामग्री और मजदूरी के बढ़ते दाम को देखते हुए यह राशि बेहद कम मानी जा रही है।

योजना को मिशन मोड में लाने से पहले सरकार को भी इस बात का अहसास हुआ है कि योजना के तहत मकान बनाने के लिए मिलने वाली राशि उचित नहीं है। ऊपर से पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय ने इंदिरा आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों के लिए शौचालय और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने को आवश्यक कर दिया है। जिसकी वजह से इसकी लागत कीमत और बढ़ गई है।

शौचालय और पेयजल उपलब्ध कराने के कारण बढ़ने वाली खर्च राशि को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय और पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय के अधिकारियों में खींचतान है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय के अधिकारियों से कहा है कि वे इंदिरा आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों के लिए शौचालय और पेयजल व्यवस्था के लिए अपने योजनाओं से राशि दें। मगर यह मंत्रालय अपनी ही योजनाओं के लिए धन की किल्लत बताई है।
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