बेडौल और भारी-भरकम शरीर से परेशान लोगों को अब वजन घटाने व दुबले होने के लिए कसरत करने और खानपान में ऐहतियात बरतने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईएफटी) के वैज्ञानिकों ने मोटापे को कम करने के लिए कीटोन नामक दवा का ईजाद किया है। यह दवा शरीर को नुकसान पहुंचाए बगैर न सिर्फ चर्बी को तेजी से कम करती है बल्कि कोलेस्ट्राल को भी नियंत्रित करती है। खास बात यह है कि दवा का असर महीने भर में ही दिखना शुरू हो जाता है।
सीआईएफटी के निदेशक डॉ. टी.के. श्रीनिवास गोपाल ने बताया कि कीटोन एक प्राकृतिक उत्पाद है। इसे प्रॉन मछली की ऊपरी त्वचा (सेल) से प्राप्त किया जाता है। दरअसल चर्बी की अधिकता से शरीर न सिर्फ बेडौल होता है बल्कि वजन भी तेजी से बढ़ता है। इस पर नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने किटोसन की खोज की है।
किटोसन ऐसा तत्व है जो चर्बी को बढ़ने से रोकता है। प्रॉन मछली की ऊपरी त्वचा में किटोसन होता है। वैज्ञानिकों ने इसे निकालकर पाउडर के रूप में परिवर्तित किया है। इसे कैप्सूल के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है। शरीर के अंदर जाने के बाद यह खाने में मौजूद चर्बी को समेट कर उसे मल के जरिए बाहर निकाल देता है।
गोपाल का कहना है कि खाना खाने के लगभग 20 मिनट पहले इस कैप्सूल का सेवन किया जाता है। इससे यह पेट में जाकर जैल के रूप में परिवर्तित हो जाता है। जब खाना पेट में जाता है तो जैल खाने में मौजूद चर्बी के तत्वों की पहचान कर उसे शरीर में फैलने से रोककर मल के साथ बाहर निकाल देता है।
लिहाजा शरीर को अपनी जरूरत के लिए आवश्यक प्रोटीन के लिए अंदर मौजूद चर्बी से पूरी करनी पड़ती है। इससे न सिर्फ अंदर की चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है बल्कि नई चर्बी के बनने की प्रक्रिया भी बंद हो जाती है और महीने भर में ही शरीर हल्का और दुबला प्रतीत होने लगता है।
मानव शरीर पर कीटोन कैप्सूल के सफल प्रयोग के बाद इसे आम आदमी के लिए बाजार में उतारा गया है। इसके विपणन के लिए सीआईएफटी ने केरल स्टेट कोऑपरेटिव फेडरेशन से अनुबंध किया है। जिसके जरिए देश भर में इस कैप्सूल की बिक्री की जा रही है। कैप्सूल को स्वच्छ पानी से ही खाया जाता है। दूध या अन्य तरल पदार्थ की मनाही है। गर्भवती महिलाएं इसका सेवन नहीं कर सकती हैं।