सरकार ने बिहार के लिए केंद्रीय मदद बढ़ाते हुए राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा देने से इनकार किया है। हालांकि सरकार के पास राज्य को विशेष पैकेज देने का प्रस्ताव है।
शुक्रवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि वर्तमान में किसी भी राज्य को विशेष दर्जा देने का प्रस्ताव नहीं है।
हालांकि राज्यों को विशेष पैकेज देने का प्रस्ताव है। सिंह बिहार के सांसद राजेश रंजन के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार लंबे समय से राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा देने की मांग के लिए दबाव डालते रहे हैं।
इससे पहले जदयू, भाजपा और उसकी सहयोगी एलजेपी ने इस मांग का समर्थन किया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2015-16 में बिहार और ओडिशा ने विभिन्न क्षेत्रों में समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विशेष पैकेज की मांग की थी।
'एक काम के बदले दो बार मजदूरी मांग रहे नीतीश'
बिहार की सियासत में रिपोर्ट कार्ड को लेकर जंग जारी है। नीतीश और माझी के बाद शुक्रवार को सुशील मोदी ने भी अपने सात साल के शासनकाल का रिपोर्ट कार्ड जारी किया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने रिपोर्टकार्ड जारी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार एक ही काम का दो बार मजदूरी मांग रहे हैं। जनता इस बार उन्हें मजदूरी नहीं बल्कि दंड देगी।
मोदी ने कहा कि पिछले ढाई साल में सरकार ने कोई काम ही नहीं किया है, जो काम हुआ वो राजग शासनकाल में ही हुआ। सात साल में बढी रफ्तार, ढाई साल में बंटाधार का नारा बुलंद करते हुए श्री मोदी ने कहा कि बिहार में अब विकास की नहीं, बल्कि एक बार फिर से जंगल राज की बात हो रही है। पिछले 29 माह में एक भी नयी योजना शुरु नहीं हुई है।
कई योजनाओं का दो-दो बार उद्घाटन जरूर किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि बढ़ चला बिहार का नारा लगानेवाले बताये कि आखिर कौन सा कारण है जो बिहार में विकास की रफ्तार कम हो गयी है। विकास दर आधा हो गया है, जबकि कृषि विकास तो नकारात्मक हो गया है। राजस्व प्राप्ति में कमी आयी है।
विदेशी पर्यटकों की संख्या में तीन लाख से ज्यादा की कमी आयी है। बिहार पर्यटन में पहले 6वें स्थान पर था, पर अब टॉप टेन से भी बाहर हो गया है। 28 हजार गांवों का अब तक विद्युतीकरण नहीं हुआ है। सड़क निर्माण के काम में भी कमी आर्यी है। अपराध में जरूर बढ़ोतरी हुई है।
गौरतलब है कि पिछले 27 जुलाई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी किया था। उसके करीब दो घंटे बाद ही मांझी ने भी अपना रिपोर्ट कार्ड पेश कर दिया था।
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