इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी हिंदू मृतक कर्मचारी की दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यदि पहली पत्नी ने अपनी सहमति दे दी हो तब भी दूसरी पत्नी को पेंशन नहीं दी जा सकती है। पहली पत्नी के जीवित रहते और दूसरी शादी नहीं करने की स्थिति में दूसरी को पेंशन लाभ देना मुमकिन नहीं है।
याची राममोहनी देवी की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी। मोहनी देवी के पति प्रेमनारायण श्रीवास्तव बस्ती में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर तैनात थे। 1954 में उन्होंने मोहनी देवी से दूसरी शादी की। पहली पत्नी कांति ने इसके लिए सहमति दी थी।
मोहनी देवी का नाम सेवा पंजिका में दर्ज कराया गया। जीपीएफ और ग्रेच्युटी के लिए उनको नामित किया गया, मगर पारिवारिक पेंशन में नाम शामिल नहीं था। पति की मृत्यु के बाद मोहनी देवी को ग्रेच्युटी, जीपीएफ आदि का लाभ मिला।
उन्होंने पेंशन दिए जाने की भी मांग की, मगर निदेशक पेंशन निदेशालय ने उनका प्रार्थनापत्र रद कर दिया। विभाग ज्येष्ठ विधवा को ही पेंशन देता है। चूंकि, दूसरी पत्नी परिवार का सदस्य नहीं होती है, इसलिए पहली के जीवित रहते उसे पेंशन नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने भी इस दलील को स्वीकार कर लिया।