जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, सियासी मैदान में एक-दूजे पर फेंके जाने वाले हथियार भी एक-एक करके बाहर आ रहे हैं। नरेंद्र मोदी अपने भाषणों से कांग्रेस और अपने तमाम विरोधियों पर हमला बोल रहे हैं, तो उन पर भी खूब हमले हो रहे हैं।
गुरुवार को मोदी गोरखपुर में मुलायम सिंह यादव पर हमला कर रहे थे, तो नेताजी ने भी मोदी को आड़े हाथों लिया। हाल में अरविंद केजरीवाल सड़क पर बैठ गए और केंद्र सरकार के खिलाफ धरना देने लगे।
लेकिन इस बीच राहुल गांधी की तरफ से कोई बड़ा बयान नहीं आया। लेकिन ऐसा नहीं कि उनकी तैयारियों में कमी है। बीते कुछ दिनों में ब्रांड राहुल को आगे बढ़ाने के लिए जो कोशिश हो रही थी, उसका नतीजा सामने आने लगा है।
इशारों-इशारों में हुए हमले
आज देश के सभी प्रमुख अखबारों में राहुल गांधी को केंद्र में रखकर कांग्रेस ने एक विज्ञापन जारी किया है, जिसमें किसी विरोधी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन संकेतों में सारे हमले कर दिए गए हैं।
भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी और उसके बाद दिल्ली की सियासत में अचानक उभरे आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल जनता को यह भरोसा दिलाने में जुटे हैं कि उन दोनों पास विजन है, जो देश को तरक्की के रास्ते पर ले जा सकता है।
जनता ने दिल्ली में केजरीवाल को 28 सीटों से नवाजकर यह भी साफ कर दिया था कि वह नए राजनीतिक दल को मौका देने के लिए भी तैयार हैं। ऐसे में राहुल गांधी और कांग्रेस ने तैयारियां शुरू कर दीं और हमले अब सामने हैं।
'मैं नहीं, हम' को किया गया रेखांकित
आज छपे विज्ञापन में सबसे ऊपर 'मैं नहीं, हम' लिखा है। जाहिर है, कांग्रेस राहुल के इस विज्ञापन के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह मोदी और केजरीवाल की तरह व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक कोशिश में यकीन करती है।
विज्ञापन में आगे लिखा है, "किसी भी एक हाथ में जादू की छड़ी नहीं होती कि बस घुमाई और हो गई तरक्की। हम सबको साथ मिलकर एक महान भारत बनाना है। इसलिए कांग्रेस का उद्देश्य है हर हाथ में शक्ति, ताकि हर किसी को मिले तरक्की के पूरे अवसर।"
इसके बाद कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ बना है और ठीक बराबर में लिखा है, 'हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की।' इसी नारे को लेकर कांग्रेस चुनावों में उतरना चाहती है और उम्मीद कर रही है कि वह एक बार फिर अपनी गद्दी बचाने में कामयाब रहेगी।
समग्र विकास की विचारधारा पर जोर
विज्ञापन में केवल शब्दों का खेल है, ऐसा नहीं है। इसमें इस्तेमाल की गई तस्वीर भी अपनी कहानी कहती है। मध्य में राहुल गांधी खड़े मद्धम मुस्कुरा रहे हैं और साथ में खड़े लोग कांग्रेस की 'समग्र विकास' की विचारधारा को रेखांकित कर रही है।
राहुल गांधी के साथ इस विज्ञापन में आप महिलाओं और किसानों की भागीदारी के अलावा मजदूरों और आदिवासियों को भी देख सकते हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय को रिझाने की कोशिश भी की गई है।
साथ ही साथ विज्ञापन में पूर्वोत्तर का भी खास ख्याल रखा गया है। पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को पांच में से चार राज्यों में हार का मुंह देखना पड़ा। जो एकमात्र जीत नसीब हुई, वह पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम की वजह से।
बोलने में नहीं, करने में यकीनः राहुल
राहुल गांधी बार-बार कहते रहे हैं कि वह अपने विरोधियों की तरह बोलने में नहीं, बल्कि करने में यकीन रखते हैं। हाल में अमेठी पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष ने वहां पर भी इसी बात पर जोर दिया।
कांग्रेस मोदी और केजरीवाल, दोनों को ऐसे नेताओं के रूप में प्रस्तुत करती रही है, जिनकी व्यक्तिगत सोच और विचारधारा अपनी-अपनी पार्टी से बड़ी मानी जाती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इन दोनों को तानाशाह करार दे चुके है।
यही वजह है कि राहुल गांधी को आगे बढ़ाने वाले इस विज्ञापन में साफ कर दिया कि किसी के हाथ में जादू की छड़ी नहीं, जो घुमाते ही तरक्की तक पहुंचा जा सके। जाहिर है निशाने पर मोदी और केजरीवाल हैं।
प्रियंका को यकीन, राहुल बनेंगे पीएम
राहुल गांधी को भले कांग्रेस ने अपना पीएम दावेदार नहीं बनाया हो, लेकिन यह साफ है कि अगर लोकसभा चुनावों में पार्टी किसी तरह सत्ता की सीढ़ी चढ़ने में कामयाब रही, तो वही उसके पीएम होंगे।
खुद राहुल भी कहने लगे हैं कि अगर चुनावों के बाद पार्टी कार्यकर्ता कहते हैं, तो वह प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। यह बात और है कि उन्हें इस बार भाजपा और AAP जैसी ताकत से चुनौती मिलने जा रही है।
उनकी बहन प्रियंका गांधी भी राहुल को लेकर सकारात्मक दिख रही हैं। गुरुवार को अमेठी में उनसे पूछा गया कि क्या पीएम बनने का सपना पूरा होगा, तो उन्होंने पहले सवाल किया, "किसका?" संवाददाता ने जवाब में कहा, "राहुल गांधी" तो उन्होंने तुरंत कहा, "क्यों नहीं!"
ब्रांडिंग में खर्च हो रहे हैं करोड़ों रुपए
राहुल गांधी की ब्रांडिंग पर पार्टी काफी गौर कर रही है और कुछ दिन पहले ही दिग्गज जापानी एडवरटाइजिंग और पब्लिक रिलेशंस कंपनी देंत्सु इंडिया 'आम आदमी के सशक्तिकरण' की अवधारणा को लेकर एक बड़ा कैम्पेन तैयार करने की बात आई थी।
इस प्रचार अभियान में राहुल गांधी को एक ऐसे नौजवान और उत्साहित नेता के रूप में पेश किया जाना है, जो आम आदमी की आकांक्षाओं को पूरा करने में दमखम रखते हैं। नया विज्ञापन कुछ इसी तर्ज पर दिखता है।
देंत्सु इंडिया और जेडब्ल्यूटी के साथ जाने का अंतिम फैसला करने वाले राहुल गांधी ने ही किया है। दोनों कंपनियां चुनावों के लिए 500 करोड़ रुपए के एडवरटाइजिंग कॉन्ट्रैक्ट संभालेंगी और वह प्रचार के डिजाइन में निजी दिलचस्पी ले रहे हैं।