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नटवर का मनमोहन-सोनिया पर बड़ा आरोप

Sat, 23 Aug 2014 08:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने यूपीए-1 के दौरान खुद को विदेश मंत्री नहीं बनाए जाने देने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर अमेरिकी दबाव में आने का आरोप लगाया है।
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उन्होंने कहा, "कमजोर नेतृत्व पर हमेशा से विदेशी शक्तियां हावी हो जाती हैं। चूंकि मनमोहन सिंह का नेतृत्व बहुत कमजोर था इसलिए अमेरिका ने न केवल मंत्रिमंडल के गठन में अपनी भूमिका निभाई, बल्कि सरकार की कई नीतियों में भी सीधा दखल दिया।"

पूर्व विदेश मंत्री ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी की यूपीए-1 सरकार के कार्यकाल के दौरान नीतियां तय करने में अहम भूमिका निभाने का भी आरोप लगाया।

नटवर की हालिया प्रकाशित किताब 'वन लाइफ इज नॉट इनफ' में मनमोहन सिंह के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी अमेरिका के दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया है।
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उल्लेखनीय है कि यूपीए-1 के कार्यकाल के दौरान ही तेल के बदले अनाज घोटाला संबंधी आरोप में नटवर सिंह को विदेश मंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी।
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'कमजोर नेतृत्व पर हावी होती हैं विदेशी शक्तियां'

नटवर सिंह ने इस संबंध में अपनी पुस्तक में लिखे गए तथ्यों को पूरी तरह सही करार दिया। उन्होंने कहा कि खुद प्रधानमंत्री और बाद में कांग्रेस अध्यक्ष ने उनसे विदेश मंत्रालय की जगह कोई और मंत्रालय लेने का आग्रह किया था।

सिंह ने कहा, "कमजोर नेतृत्व में अक्सर विदेशी शक्तियां हावी होती रही हैं। यूपीए की बनी पहली सरकार में चूंकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नेतृत्व बेहद ढीला ढाला और कमजोर था, इसलिए अमेरिका ने इस स्थिति का भरपूर लाभ उठाया।"

उन्होंने कहा कि न केवल मंत्रालय के बंटवारे में अमेरिका का दबाव था, बल्कि तत्कालीन सरकार की नीतियां तय करने में सीआईए ने लगातार अहम भूमिका निभाई।

पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि जिस तरह अमेरिका उन्हें विदेश मंत्री नहीं बनने देना चाहता था, ठीक उसी तरह उसके निशाने पर प्रणब मुखर्जी भी थे।

अमेरिका चाहता था कि वित्त मंत्रालय का जिम्मा प्रणब के बदले योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह आहलूवालिया को दिया जाए। इसके लिए अमेरिका ने अंत समय तक प्रयास किया।
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