प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल के अपने कार्यकाल के बारे में कहा है कि उन्होंने इस दौरान सरकारी मशीनरी को ठीक करने के लिए सहज और लोकलुभावन तरीके अपनाने के बजाय कठिन रास्तों को चुना।
उन्होंने कहा कि सत्ता संभालने के बाद उनके पास दो विकल्प थे। एक विकल्प व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए चीजों को व्यवस्थित तरीके से सुधारने का था, जबकि दूसरा विकल्प लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा कर चर्चा में बने रहना था। उन्होंने कहा कि पहले विकल्प पर चलने से दीर्घ अवधि में देश को फायदा होगा, वहीं दूसरे विकल्प पर चलना जनता को मूर्ख बनाना है। दूसरा विकल्प आसान है और जनता भी इससे अवगत है।
एक साल के कार्यकाल पर पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरे विकल्प के बजाय पहले को चुना। उन्होंने कहा कि अगर वह लोकलुभावन तरीके को अपनाते तो यह जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ होता। सरकार के कामकाज में बदलाव के लिए उठाए गए तरीकों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि वे जनता के सेवक हैं। इसके साथ ही सरकार ने केंद्र सरकार के दफ्तरों में अनुशासन कायम किया है।