भाजपा का ‘चाय पे चर्चा विद नमो’ कार्यक्रम मुश्किल में फंसता दिख रहा है क्योंकि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया के दौरान वोटरों को किसी भी तरह प्रलोभन देने की अनुमति नहीं है और इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है।
आयोग के प्रशासन ने माना है कि वोटरों को चाय पिलाने को वोटरों को लुभाना माना जाएगा।
भाजपा ने आगामी 20 मार्च से ‘चाय पे चर्चा’ का तीसरा चरण शुरू करने का कार्यक्रम बनाया है। इसके तहत नरेंद्र मोदी किसानों के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
यह कार्यक्रम पहले से ही मुश्किल में फंस चुका है क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनाव आयोग के अधिकारियों ने लखीमपुर खीरी जिले में कुछ भाजपा नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
उन्होंने मुफ्त में चाय पिलाने को आचार संहिता का उल्लंघन माना है। यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी उमेश सिन्हा ने कहा, ‘कानून के तहत चुनावी प्रक्रिया के दौरान वोटरों को किसी तरह का लालच देना गैर कानूनी है।’
हालांकि मुख्य चुनाव आयोग की राय इससे अलग है। निर्वाचन सदन के अधिकारियों का कहना है कि दो रुपये की चाय देने को हम लालच का नाम नहीं दे सकते।
इस संबंध में भाजपा नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं। चुनावी पैनल नई प्रचारों पर भी काम कर रहा है, जिसे समय के साथ बदला जाएगा।