नरेंद्र मोदी ने रोहनिया की सभा में गुरुवार को खुद को किसानों, बुनकरों, गरीबों, बेरोजगारों के खेवनहार के रूप में पेश किया। कट्टर हिंदूवादी नेता की छवि के आरोपों से उबरने और गंगा-जमुनी तहजीब के शहर से दिल का नाता जोड़ने का उनका जुदा अंदाज लोगों का बरबस ध्यान खींच रहा था।
भीड़ के बीच मंच पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी कर्नल निजामुद्दीन के पैर छूकर बड़ों के सम्मान के प्रति अपनी परिपाटी जाहिर की तो शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की गंगा के प्रति गहरी आस्था का बखान कर दूर की कौड़ी खेली।
बेनिया बाग में भले ही उन्हें अपनी बात कहने के लिए मंच नहीं मिल सका, लेकिन अपने सधे तजुर्बे से मोदी एक ही सभा में पूरी कसर निकालने से नहीं चूके।