प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन देशों की यात्रा समाप्त कर देश लौटते ही संजय जोशी के समर्थन में पोस्टर लगा दिए गए।
वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के आवास और भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय के बाहर लगे पोस्टरों में संजय जोशी की 'घर वापसी' की मांग की गई।
माना जा रहा है कि उन पोस्टरों को संजय जोशी के समर्थकों ने लगाया था, जिन पर लिखा गया था- सबका साथ, सबका विकास, फिर क्यों नहीं संजय जोशी से बात।
उन पोस्टरों का बाद में हटा दिया गया, लेकिन संजय जोशी एक बार फिर चर्चा में आ गए। और ये चर्चा भी शुरु हो गई है कि क्या वाकई संजय जोशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए खतरा हैं?
संजय जोशी को जन्मदिन की बधाई देने के मामले में पिछले सप्ताह केंद्र सरकार के तीन मंत्रियों श्रीपाद नाईक, सर्वानंद सोनोवाल और संजीव बालियान को नोटिस देने की अफवाह भी उड़ी थी।
हालांकि संजीव बालियान ने बाद में ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि वे संजय जोशी को जानते तक नहीं।
जन्मदिन की बधाई के मामले में ही श्रीपाद नाईक के पीए नितिन सरदारे को बर्खास्त करने की खबर भी आई। संजय जोशी प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी या उनके समर्थकों की आंखों की किरकिरी क्यों बने हुए हैं?
क्या कारण है कि भाजपा को कोई नेता या कार्यकर्ता संजय जोशी से अपनी करीबी दिखाता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लॉबी उसकी जड़ें खोदना शुरु कर देती है।
कितनी पुरानी है नरेंद्र मोदी और संजय जोशी अदावत-