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बस्तर में होगी मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ की परीक्षा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दंतेवाड़ा आ रहे हैं। यह दौरा उनके ‘मेक इन इंडिया’ का इम्तिहान है। वे बस्तर में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के साथ होने वाले करीब 24 हजार करोड़ रुपये के करार के साक्षी होंगे।
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इंदिरा गांधी के बाद करीब 45 वर्ष बाद दंतेवाड़ा पहुंचने वाले मोदी पहले प्रधानमंत्री होंगे। उनके आगमन को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जब इंदिरा गांधी यहां आई थीं, तब नक्सलवाद का नामोनिशान नहीं था। अब जब मोदी यहां पहुंच रहे हैं, तो बहुत कुछ बदला हुआ है।

दंतेवाड़ा और उससे अलग होकर नया जिला बना सुकमा माओवादी हिंसा की वजह से सुर्खियों में हैं। बस्तर में कांग्रेस के अभेद्य किले में भाजपा पूरी तरह से सेंध लगा चुकी है। सांसद, विधायक, जिला पंचायतों में भाजपा के जनप्रतिनिधि निर्वाचित हैं। ऐसे में मोदी का यह प्रवास कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
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‘मेक इन इंडिया’ अगर सफल होती है तो

मोदी ‘मेक इन इंडिया’ और भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर भी बेहद संजीदा हैं। बस्तर में जो चार बड़े करार (एमओयू) होने हैं उनमें चारों भूमि अधिग्रहण के दायरे में हैं।

पहला अल्ट्रा मेगा स्टील प्लांट, दूसरा जगदलपुर-दल्लीराजहरा रेल मार्ग निर्माण, तीसरा एनएमडीसी द्वारा फाइन ओर को नगरनार प्लांट तक ले जाने के लिए पाइप लाइन निर्माण और चौथा एनएमडीसी परियोजना क्षेत्र में पेलिट प्लांट के निर्माण का है। इन सभी परियोजनाओं की लागत करीब 24 हजार करोड़ रुपये है।

आदिवासी बहुल इस इलाके में ‘मेक इन इंडिया’ अगर सफल होती है तो इसके दूरगामी लाभ भी होंगे। साथ ही यह दिखाने-समझने का अवसर होगा कि वे अपनी भूमि अधिग्रहण योजना को लेकर कितने सही हैं।
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दौरे से काफी उम्मीदें

बस्तर में अपने इकलौते प्रवास के बावजूद यहां के आदिवासियों में नेहरू और इंदिरा गांधी के नाम से कांग्रेसी चार दशकों तक वोट पाते रहे। ऐसे में मोदी के इस प्रवास का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए भाजपा ने भी पूरी ताकत झोंक दी है।

प्रदेश की भाजपा सरकार की नजर केंद्र की मदद पर टिकी है। मोदी के सामने खुद को साबित करने का मौका मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह भी नहीं चूकना चाहते। इसलिए दंतेवाड़ा में बनाए गए एजुकेशन सिटी, लाइवलीहुड कॉलेज, सक्षम, शक्ति जैसी योजनाओं को सरकार अपने ब्रांड के रूप में प्रोजेक्ट करने की तैयारी में है, जिसे मोदी की पारखी नजरों से गुजरना होगा।

नेहरू और इंदिरा ने भी किया था अविभाजित बस्तर का दौरा
आजादी के बाद अविभाजित बस्तर में आने वाले दो कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों में जवाहर लाल नेहरू (1957) पहले रहे। इसके बाद इंदिरा गांधी (1970) में बतौर प्रधानमंत्री यहां आई थीं और दंतेवाड़ा भी गई थीं। हालांकि बस्तर में मोरारजी देसाई, वीपी सिंह भी बतौर प्रधानमंत्री यहां आए थे। इनके अलावा कांग्रेस से राजीव गांधी पार्टी के महासचिव रहते हुए 1984 में दंतेवाड़ा आए थे। 1952 में राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने दंतेवाड़ा का दौरा किया था।
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