वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को राज्यसभा से पास कराने को लेकर सपा और बसपा को अपने पाले में लाने की सरकार की कोशिश रंग लाने लगी है। सपा और बसपा जीएसटी बिल के समर्थन में जुटती नजर आ रही हैं।
वहीं एआईडीएमके, डीएमके जैसे दूसरे क्षेत्रीय दलों के लिए भी जीएसटी बिल के विरोध पर ज्यादा देर तक टिकना मुश्किल लग रहा है। सपा जीएसटी बिल के समर्थन में आने लगी है।
सपा नेता नरेश अग्रवाल ने अमर उजाला को कहा, जीएसटी बिल पर सरकार ने भरोसा दिया है कि इससे राज्यों को लाभ होगा। राज्यों के लाभ के लिए पार्टी इसके बिल का समर्थन करती है।
वहीं बसपा के उच्च पदस्थ सूत्र भी बिल के समर्थन के संकेत दे रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस, बीजद, तेलंगाना राष्ट्र समिति आदि दलों ने लोकसभा में बिल का समर्थन कर पहले ही अपना रुख साफ कर दिया है।
कांग्रेस क्या करेगी?
बिहार की जनता दल युनाइटेड ने पत्ते नहीं खोले है मगर उसका भी अंदरखाने बिल को लेकर विरोध नहीं है। इस मामले में अब कांग्रेस और माकपा ही बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग पर अड़ी हैं।
जीएसटी बिल के विरोध में कांग्रेस किस हद तक जाएगी। इसे लेकर भी सस्पेंस बरकरार है। राज्यसभा में अगर बिल को पास कराने के लिए वोटिंग होती है तो उस स्थिति में कांग्रेस क्या करेगी। वह इस मुद्दे पर बोलने से बच रही है।
लोकसभा में कांग्रेस ने वाकआउट किया था। सरकार के मैनेजरों का कहना है कि अगर राज्यसभा में भी कांग्रेस वाकआउट करती है तो सरकार को लाभ होगा और जीएसटी बिल आसानी से पास होगा। मगर कांग्रेस का कड़ा रुख माना जा रहा है। दूसरी तरफ वामपंथी दल बिल के खिलाफ वोटिंग करने की बात कर रहे हैं। उनका मानना है कि जीएसटी बिल से राज्यों को नुकसान होगा।
कांग्रेस का गड़करी के जरिए जीएसटी पर निशाना
कांग्रेस ने सरकार को चेताया है कि सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की कंपनी पूर्ति के बैंक कर्ज का मामला कैग के उठाए सवालों के मुद्दे पर संसद नहीं चलने देगी।
दूसरी तरफ कांग्रेस के मैनेजरों का कहना है कि कांग्रेस गडकरी के इस्तीफे को लेकर अचानक इसलिए अड़ गई है, क्योंकि जीएसटी बिल को लेकर ज्यादातर दल समर्थन देने के लिए तैयार हो गए हैं और वह अकेले पड़ गई है। इसलिए बिल की राह रोकने के लिए गडकरी के इस्तीफे के बहाने हंगामे का सहारा ले रही है।
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा ने टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के मुद्दे पर तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के इस्तीफे को लेकर तीन महीने तक संसद नहीं चलने दी थी। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भाजपा ने तीन महीने संसद का काम ठप कर दिया था। अब यह भाजपा अपने मंत्री की गड़बड़ी पर चुप क्यों है?
प्रधानमंत्री क्यों चुप है? सरकार को जवाब देना पड़ेगा। सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस ही नहीं बल्कि राज्यसभा में समूचा विपक्ष भी गडकरी का इस्तीफा मांग रहा है। सरकार को विपक्ष का मूड भांपना चाहिए। सदन को चलाने की जिम्मेदारी विपक्ष की नहीं बल्कि सरकार की है।
जीएसटी की राजनैतिक बाधाएं
लोकसभा से पास होने के बाद वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) बिल को लेकर सरकार की मुश्किल कम होती नहीं दिख रही है। राज्य सभा में गैर एनडीए दलों की एकजुटता सरकार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। सरकार के बिल के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए अब दो दिन का समय ही बचा है।
ये हैं चुनौतियां
- राज्यसभा में अल्पमत में है सरकार
- संवैधानिक संशोधन बिल के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत यानी 162 वोटों की जरूरत
- कांग्रेस के साथ एआईएडीएमके, डीएमके और वाम दलों के साथ निर्दलीय और नामित सदस्यों की एकजुटता
- तृणमूल कांग्रेस और बीजद जैसे गैर एनडीए क्षेत्रीय दलों का समर्थन हासिल नहीं
- कांग्रेस बिल को स्थायी समिति को भेजे जाने के पक्ष में