नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट का कैसी होगी, ये सवाल अब भी पूछा जा रहा है। 16 मई के बाद से कयासीबाजी की जा रही है, कैबिनेट में जगह पाने के लिए गुजरात भवन के बाहर भाजपा नेताओं का तांता लगा है।
विज्ञापन
मंगलवार को उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। 26 मई शपथ ग्रहण की तारीख मुकर्रर की गई है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंत्रियों की सूची भेजने का अनुरोध किया है। फिर भी नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल को लेकर अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
हालांकि ऐसी खबरें जरूर आ रही है कि नरेंद्र मोदी की कैबीनेट का चेहरा-मोहरा, रूप-रंग वैसा बिलकुल नहीं होगा, जैसे यूपीए सरकार का था। नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में ऐसी कई खूबियां हो सकती हैं, जो पिछली यूपीए सरकार में नहीं थी।
विज्ञापन
यूपीए कैबिनेट से छोटी होगी मोदी की कैबिनेट
माना जा रहा है कि नरेद्र मोदी की कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या यूपीए सरकार की कैबिनेट से कम रह सकती है। माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में यूपीए सरकार की 70 मंत्रियों की कैबिनेट के उलट लगभग 50 मंत्री ही शामिल करेंगे।
मंत्रियो की संख्या कम करने के लिए कई मंत्रालयो का आपस में विलय भी किया जा सकता है।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया, 'भाजपा की योजना यूपीए के 70 मंत्रियों की कबिनेट की तुलना में छोटा मंत्रिमंडल गठित करने की है। हमारी कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या लगभग 50 तक रह सकती है। कई मंत्रालयों का आपस में विलय भी किया जा सकता है।
कई मंत्रालयों का किया जाएगा विलय
जिन मंत्रालयों को आपस में विलय करने पर विचार चल रहा है, उनमें पॉवर, कोल, एटॉमिक और रिन्यूवेबल एनर्जी भी शामिल है। इन्हें मिलाकर एक मंत्रालय ऊर्जा मंत्रालय बनाया जाएगा।
ऐसे ही सड़क, परिवहन, राजमार्ग, शिपिंग और पोर्ट मंत्रालयों को आपस में मिलाकर परिवहन मंत्रालय बनाया जा सकता है। नई कैबिनेट में सभी प्रमुख मंत्रालयों का भाजपा अपने पास ही रखेगी।
इन मंत्रालयों में गृह, रक्षा, वित्त और विदेश मंत्रालय शामिल हैं। माना जा रहा है कि वरिष्ठ भाजपा नेता अरूण जेटली वित्तमंत्री पद की दौड़ की रेस में सबसे आगे हैं। कैबिनेट में भाजपा के सहयोगी दलों को भी शामिल किया जाएगा।
मोदी की कैबिनेट में टेक्नोक्रेट्स को भी मौका
मोदी की कैबिनेट में टेक्नोक्रेट्स को भी मौका दिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, राज्यमंत्रियों के स्तर पर और छोटे मंत्रालयों की जिम्मेदारी टेक्नोक्रेट्स को सौंपी जाएगी।
मोदी की कैबिनेट की सही-सही तस्वीर अगले दो दिनों में साफ हो जाने की संभावना है। मंत्रालयों की बंटवारें में मोदी के फैसलों का ही अंतिम माना जा रहा है।
टैक्नोक्रेट्स को शामिल करने के मोदी सरकार का मकसद सरकारी कामकाज में उनकी विशेषज्ञता का अधिक-अधिक से उपयोग करना है। टेक्नोक्रेट्स मोदी सरकार को कई महत्वपूर्ण परामर्श दे सकते हैं।
बड़े मंत्रालयों को भाजपा अपने पास रखेगी
हालांकि बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी ऐसे ही नेताओं को दी जाएगी, जिनकी वैश्विक स्तर पर बेहतर समझ हो। बड़े मंत्रालयों को भाजपा अपने ही नेताओं के बीच बांट सकती है।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के विपरीत इस बार सहयोगी दलों को ऐसे मंत्रालयों से दूर ही रखा जाएगा। सरकार के भीतर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट को सबसे ताकतवार माना जा है। प्रधानमंत्री समेत इस समिति में रक्षा, गृह, वित्त और विदेश मंत्री शामिल होते है।
वाजपेयी सरकार ने सुरक्षा मामलो की कैबिनेट में सहयोगी दलों को भी शामिल किया था। जॉर्ज फर्नांडिज राजग सरकार में रक्षामंत्री थे। हालांकि यूपीए सरकार में किसी भी सहयोगी दल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी में नहीं शामिल किया गया।
सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट में शामिल करने के लिए कई टेक्नोक्रेट्स को आमंत्रित किया गया है।
पिछले कई दिनों से एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन दीपक पारेख और आईसीआईसीआई बैंक के गैर कार्यकारी चेयरमैन केवी कामथ की मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा भी है।
यूपीए सरकार में कैबिनेट स्तर के 28, राज्य स्तर (स्वतंत्र प्रभार) के स्तर के 11 और राज्य स्तर के 32 मंत्री शामिल थे।