कांग्रेस ने मोदी सरकार पर महिला बाल विकास मंत्रालय और यूनिसेफ संस्थान के सर्वेक्षण को छिपाने का आरोप लगया है, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात मॉडल का असली सच सबके सामने आ जाता।
कांग्रेस का आरोप है कि इस सर्वेक्षण में पता चला है कि गुजरात में सिर्फ 56 प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण किया गया है जो राष्ट्रीय औसत से कम हैं। देश राष्ट्रीय औसत 65 प्रतिशत है।
कांग्रेस ने कहा कि इस रिपोर्ट में यूपीए सरकार के दस सालों में देश में कुपोषण का प्रभाव कम करने की भी बात कही गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने महिला बाल विकास मंत्री को चिट्ठी लिखकर कई बार इस रिपोर्ट के बारे में पूछा गया। मगर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
मोदी मॉडल की बुनियाद झूठी!
यह सर्वे नवंबर 2013 से लेकर मई 2014 तक के कार्यकाल में किया गया
है। केन्द्रीय बाल एवं महिला कल्याण मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र की
यूनीसेफ के देश के एक लाख बच्चों, 1 लाख परिवारों और 5 हजार आंगनवाड़ी
कार्यकर्त्ताओं का सर्वेक्षण किया गया।
जयराम ने कहा कि गुजरात के
सर्वेक्षण के जो नतीजे आए हैं वो यह साफ दर्शाते हैं कि मोदी मॉडल एक धोखा
है, मोदी मॉडल की बुनियाद झूठी है। इस सर्वेक्षण में यह पता चला है कि 2
साल की उम्र के बच्चों को जो सात टीके लगते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी वो इस
कार्यक्रम को ‘इंद्रधनुष कार्यक्र्तम’ का नाम देते हैं। हर साल 25 लाख
बच्चों को यह टीके लगाए जाते हैं। इस सर्वेक्षण से यह पता चला है कि गुजरात
में सिर्फ 56 प्रतिशत बच्चों को यह सात टीके लगाए गए हैं जो औसत से कम
हैं।
29 राज्यों के सर्वेक्षण में गुजरात का 21 वां स्थान
तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक इन मामलों में गुजरात से आगे हैं। 29 राज्यों
में यह सर्वेक्षण किया गया है जिसमें गुजरात का स्थान 21 वां है।
दूसरा
कारण इस सर्वेक्षण को दबाने का जो है वो ये है कि इस सर्वेक्षण से यह पता
चलता है कि 2004 से लेकर 2014 के बीच में बच्चों का कुपाषण भारी मात्रा में
घटा है।
2004 में करीब 42 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार थे और 2014 में
30 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार थे। 2004 से लेकर 2014 तक राष्ट्रीय औसत
40 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत हुआ है।
यह सर्वेक्षण यह दिखाता है कि
गुजरात में ग्रामीणों की 60 प्रतिशत आबादी खुले में शौच करती है और जो
बच्चों का कुपोषण है वो औसत की तुलना में गुजरात में अधिक है।