केंद्र की मोदी सरकार अपनी ही पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के किताब मामले में अपने पूर्व में दिए अपने उस बयान से पीछे हट गई है, जिसमें उसने स्वामी पर मुकदमा चलाने को सही बताया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से उस बयान को वापस करने की गुहार लगाई है।
केंद्र सरकार ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह तथ्यों के आधार पर दिया गया केवल बयान था ना कि सरकार का कोई नजरिया। इस हलफनामे में कहा गया है कि स्वामी की किताब को लेकर कोई अवधारणा नहीं थी। यह मामला तो अदालत में विचाराधीन है।
सरकार ने साफ किया कि स्वामी द्वारा कानून के प्रावधानों को चुनौती देने का वह समर्थन करती है। मालूम हो कि स्वामी ने टेरेरिज्म इन इंडिया नामक किताब लिखी है।
आरोप लगाया गया है कि इस किताब में लिखी बातों से समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलने का खतरा है। इस संबंध में एक अदालत द्वारा गैरजमानती वारंट जारी करने के बाद स्वामी ने भारतीय दंड संहिता की धारा-153 ए(विभिन्न समुदाय के बीच वैमनस्यता फैलाने) को चुनौती दी है।