फिल्मकार और सेंसर बोर्ड प्रमुख पहलाज निहलानी ने अपने म्यूजिक वीडियो की आलोचना पर कहा है वो तो बस भविष्य के भारत की कल्पना कर रहे थे। पहलाज निहलानी पर आरोप है कि उन्होंने न केवल ये वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में बनाया है, बल्कि इसमें इस्तेमाल किए गए शॉट्स भारत के नहीं, विदेशों के हैं।
करीब सात मिनट लंबी इस लघु फिल्म में नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की गई है। वीडियो में कहा गया है कि भारत उनके नेतृत्व में विश्व में अपनी जगह बना रहा है। इसमें कुछ उत्साहित युवक भारतीय तिरंगा लिए 'मेरा देश है महान' नाम का गीत गा रहे हैं।
लेकिन इस फिल्म की भारी आलोचना हो रही है और सोशल मीडिया पर इसका खूब मजाक उड़ाया जा रहा है। कारण ये कि इसमें बात तो 'मेक इन इंडिया' की हो रही है लेकिन शॉट्स रूस, मॉस्को और फ्रांस के हैं।
वीडियो में 160 शॉट्स हैं
पहलाज निहलानी की इस फिल्म में नासा के यान और अंतरिक्ष के अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को दिखाया गया है, दुबई की सड़कों के शॉट्स लिए गए हैं और मॉस्को की इमारतों के खूबसूरत चित्र दिखाए गए हैं। वीडियो को हाल ही में रिलीज हुई एक फिल्म के मध्य में दिखाया जा रहा है।
आलोचना पर पहलाज निहलानी का कहना है, “वीडियो में 160 शॉट्स हैं। इनमें पांच शॉट्स ऐसे हैं जिनमें हमने दिखाया है कि हमारा भविष्य का भारत ऐसा होगा। हर फिल्मकार की विजुएल इमैजिनेशन होती है। हमने दिखाया है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से भविष्य का भारत कैसा दिखेगा। इसमें बड़ी बात क्या है?” लेकिन क्या वो भारतीय स्थलों, चंद्रयान, या भारतीय इमारतों को इस फिल्म में नहीं दिखा सकते थे?
पहलाज निहलानी कहते हैं, “जो शॉट मेरे विजन में आता है मैंने वो शॉट्स लिए हैं और भविष्य का भारत दिखाया है। भारत में पटाखे बनते हैं तो हम चीन से क्यों मंगाते हैं। अगर हम हवाई जहाज भारत में बनाते तो बाहर से क्यों लेकर आते।”
मैंने नरेंद मोदी और महात्मा गांधी की तुलना नहीं की है
आलोचक एक जगह नरेंद्र मोदी और बापू के एक साथ जिक्र पर भी आपत्ति कर रहे हैं। इस पर निहलानी कहते हैं, “मैंने नरेंद्र मोदी और महात्मा गांधी की तुलना नहीं की है। मैंने कहा है, जो सपना देखा बापू, मोदी ने…। ये फिल्मी भाषा होती है। स्वच्छ भारत का सपना बापू का था जो मोदी जी पूरा कर रहे हैं और फिल्म में मैं कह रहा हूं, हमें इसे मिल-जुल कर पूरा करना है। मैं कोई तुलना नहीं कर रहा हूं। ये उन लोगों की सोच है जो देश की तरक़्की होते नहीं देखना चाहते।”
एफटीटीआई छात्रों के आंदोलन और हड़ताल पर पहलाज निहलानी ने कहा कि एफटीआईआई के छात्रों का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा रहा है और उन्हें इसमें ढकेला जा रहा है। वो कहते हैं, “असहिष्णुता की बात वो कर रहे हैं जो मोदी जी की सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं।”
चाटुकारिता के इल्जाम पर पहलाज निहलानी ने कहा, “मैं एक नागरिक के तौर पर प्रधानमंत्री से प्रभावित हूं। जिसको जो मर्जी आए वो करे। मुझे उससे क्या लेना देना। वो खुद अपने गिरेबान में झांककर देखें कि वो क्या कर रहे हैं। मैं मैडम-मैडम नहीं कर रहा हूं। मैं मोदी-मोदी कर रहा हूं।” तो क्या वो खुद को राजनीति में शामिल होते, या फिर भाजपा से जुड़ते देखते हैं। वो कहते हैं, “मैं फिल्म इंडस्ट्री में बहुत खुश हूं। मुझे राजनीति में नहीं जाना है।”